ब्रह्मांड की गहराइयों को नापने की दिशा में मानवता ने एक बड़ी छलांग लगाई है। नासा (NASA) का आर्टेमिस II मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। चंद्रमा के 'फार साइड' की परिक्रमा करने के बाद, ओरियन कैप्सूल चार जांबाज अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में उतर गया है।
10 दिनों के इस रोमांचक और चुनौतीपूर्ण सफर ने न केवल 50 साल पुराने रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि 2028 में होने वाली मून लैंडिंग और भविष्य के 'मंगल मिशन' के लिए रास्ता भी साफ कर दिया है।
प्रशांत महासागर में सुरक्षित 'स्पलैशडाउन
शुक्रवार को नासा का ओरियन स्पेसक्राफ्ट (Orion Spacecraft) दक्षिणी कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में उतरा। 'स्पलैशडाउन' के बाद नासा और अमेरिकी नौसेना की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाला।
Orion's main parachute has deployed. The spacecraft has a system of 11 chutes that will slow it down from around 300 mph to 20 mph for splashdown.
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Welcome home Reid, Victor, Christina, and Jeremy! 🫶
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The Artemis II astronauts have splashed down at 8:07pm ET (0007 UTC April 11), bringing their historic 10-day mission around the Moon to an end. pic.twitter.com/1yjAgHEOYl
Big smiles from Christina and Victor on the deck of the USS John P. Murtha, as they waited to be escorted for their routine post-mission medical checks. pic.twitter.com/3KwZFXTLhI
— NASA (@NASA) April 11, 2026
लगभग एक घंटे की प्रक्रिया के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को कैप्सूल से बाहर निकाला गया और हेलीकॉप्टर के जरिए रिकवरी शिप पर ले जाया गया, जहाँ उनका प्रारंभिक मेडिकल चेकअप हुआ। कैप्सूल पानी में तैरता रहे और सुरक्षित रहे, इसके लिए रिकवरी ऑपरेशन को बेहद सावधानी से अंजाम दिया गया।
LIVE: They are coming home.
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Watch as the Artemis II crew returns to Earth, splashing down at around 8:07pm ET (0007 UTC April 11). https://t.co/n3vZE2rcFv
39,000 किमी/घंटा की रफ़्तार और अग्निपरीक्षा
वापसी का सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। जब ओरियन कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुआ, तब इसकी गति लगभग 39,000 किलोमीटर प्रति घंटा थी। वायुमंडल की रगड़ के कारण कैप्सूल के बाहर का तापमान 2760 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया था।
इस भीषण गर्मी ने कैप्सूल के चारों ओर लाल-गर्म प्लाज्मा की एक परत बना दी थी, जिसकी वजह से मिशन कंट्रोल का रेडियो संपर्क 6 मिनट के लिए पूरी तरह कट गया था। अंत में, पैराशूट के दो सेटों ने इसकी गति को 24 किमी/घंटा तक कम किया, जिससे सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सकी।
टूटे पुराने रिकॉर्ड, बना नया इतिहास
आर्टेमिस II मिशन ने अंतरिक्ष विज्ञान में कई नए कीर्तिमान स्थापित किए:-
- सबसे ज्यादा दूरी: मिशन के दौरान यात्री पृथ्वी से 4,06,771 किलोमीटर की दूरी तक पहुँचे, जो अपोलो 13 के पुराने रिकॉर्ड से भी ज्यादा है।
- कुल सफर: 10 दिनों के इस सफर में अंतरिक्ष यात्रियों ने कुल 11.16 लाख किलोमीटर की दूरी तय की।
- चंद्रमा का दीदार: यात्रियों ने चंद्रमा के 'फार साइड' के पास से गुजरते हुए उसकी अद्भुत तस्वीरें लीं और कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक टेस्ट किए।
इतिहास रचने वाले वो 'चार जांबाज'
इस ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा रहे चार अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी विशेषज्ञता से इसे सफल बनाया:-
- रीड वाइजमैन (50 वर्ष): मिशन कमांडर (अमेरिकी)।
- विक्टर ग्लोवर (49 वर्ष): पायलट (पहले ब्लैक एस्ट्रोनॉट जो चंद्रमा मिशन पर गए)।
- क्रिस्टीना कोच (47 वर्ष): मिशन स्पेशलिस्ट (पहली महिला जो चंद्रमा मिशन का हिस्सा बनीं)।
- जेरेमी हैनसन (50 वर्ष): मिशन स्पेशलिस्ट (पहले गैर-अमेरिकी/कनाडाई एस्ट्रोनॉट)।
अब लक्ष्य: 2028 में मून लैंडिंग और मंगल की तैयारी
आर्टेमिस II सिर्फ एक टेस्ट फ्लाइट नहीं थी, बल्कि नासा के उस बड़े प्लान का हिस्सा है जिसका अगला पड़ाव आर्टेमिस III है। इस सफलता ने साबित कर दिया है कि नासा का SLS रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट पूरी तरह विश्वसनीय हैं। नासा का आगामी लक्ष्य चंद्रमा पर एक स्थायी बेस बनाना है, जहाँ से भविष्य में इंसानों को मंगल ग्रह पर भेजने की तैयारी की जा सके। यह मिशन चीन के साथ अंतरिक्ष की होड़ में अमेरिका को एक कदम आगे ले गया है।










