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मिडिल-ईस्ट में दो हफ्ते के अस्थायी सीजफायर के बाद अब स्थायी शांति के लिए इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक वार्ता शुरू हो रही है।

मिडिल-ईस्ट में पिछले कई हफ्तों से जारी बारूदी संघर्ष और तनाव के बीच आज पूरी दुनिया की निगाहें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं। दशकों की कट्टर दुश्मनी को पीछे छोड़कर अमेरिका और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधि एक ही मेज पर बैठने जा रहे हैं।

दो हफ्ते के अस्थायी सीजफायर के बाद यह वार्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल युद्ध को रोक सकती है, बल्कि भविष्य के नए रणनीतिक समीकरण भी तय करेगी। पाकिस्तान इस ऐतिहासिक बातचीत का न केवल मेजबान है, बल्कि ट्रंप प्रशासन के भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में भी उभरकर सामने आया है।

ईरान की ओर से इस वार्ता का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं। उनके साथ ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ भी शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि गलिबाफ ने अपने डेलीगेशन का नाम 'मीनाब 168' रखा है।

यह नाम ईरान के मीनाब शहर में एक स्कूल पर हुए हमले की याद में दिया गया है, जिसमें 168 बच्चों की मौत हो गई थी। इस नाम के जरिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के दौरान उन मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि दे रहा है।

​अमेरिका की टीम: ट्रंप के करीबियों का दबदबा
अमेरिका की ओर से 4 दिग्गज हस्तियां इस्लामाबाद पहुँची हैं। इस टीम का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद और पूर्व सलाहकार जारेद कुश्नर भी शामिल हैं। इसके अलावा, पश्चिम एशिया के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वाइस एडमिरल ब्रैड कूपर भी इस डेलिगेशन का हिस्सा हैं। अमेरिका की इस टीम में ट्रंप के सबसे भरोसेमंद चेहरों की मौजूदगी वार्ता की गंभीरता को दर्शाती है।

​पाकिस्तान की भूमिका: मध्यस्थ और मेजबानपाकिस्तान इस शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद असीम मलिक इस पूरी वार्ता को होस्ट कर रहे हैं। पाकिस्तान की इस भूमिका की सराहना खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी की है।

​इन दिग्गजों पर भी रहेगी नजर 
ईरान की तरफ से डेलिगेशन में सर्वोच्च राष्ट्रीय रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदीन, केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती, अनुभवी राजनयिक मजीद तख्त रवांछी और सुरक्षा मामलों के जानकार मोहम्मद बागेर जोल्घाद्र के भी शामिल होने की संभावना है। कुल मिलाकर ईरान की तरफ से 6, अमेरिका की तरफ से 4 और पाकिस्तान की तरफ से 4 प्रमुख प्रतिनिधि इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे।

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