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अमेरिका ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के पारचिन सैन्य परिसर स्थित 'टालेगन-2' परमाणु साइट पर दुनिया का सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम (GBU-57) गिराया है।

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष ने अब एक ऐसा खतरनाक मोड़ ले लिया है, जिसने पूरी दुनिया को परमाणु युद्ध की आशंका से भर दिया है।

अमेरिका ने हाल ही में ईरान के एक गुप्त सैन्य परिसर पर अपना अब तक का सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम 'GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर' (MOP) गिराया है।

यह हमला उस स्थान पर किया गया है, जिसे ईरान के परमाणु हथियार बनाने की संभावित जगह माना जाता रहा है। इस सैन्य कार्रवाई ने युद्ध के उद्देश्यों को पूरी तरह बदल दिया है- अब यह संघर्ष केवल तेल या क्षेत्रीय वर्चस्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को जड़ से खत्म करने के अभियान में तब्दील हो गया।

​GBU-57 बम की विनाशकारी क्षमता और बी2 बॉम्बर का गुप्त मिशन 
ईरान के परमाणु स्थलों को निशाना बनाने के लिए अमेरिका ने जिस GBU-57 बम का उपयोग किया है, उसे विशेष रूप से गहरे भूमिगत बंकरों को नष्ट करने के लिए ही तैयार किया गया था।

13,607 किलोग्राम वजनी यह भीमकाय बम इतना भारी है कि इसे दुनिया का कोई भी सामान्य फाइटर जेट नहीं उठा सकता; इसे केवल बी2 स्टील्थ बॉम्बर के जरिए ही गिराया जा सकता है। अमेरिकी वायुसेना का बी2 बॉम्बर मिसौरी के व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से उड़ा, ईरान में अपने लक्ष्य पर सटीक प्रहार किया और लगभग 25,000 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर सुरक्षित वापस लौटा।

यह बम फटने से पहले कंक्रीट और कठोर चट्टानों को भेदते हुए करीब 200 फीट गहराई तक धंसने की क्षमता रखता है।

​पारचिन सैन्य परिसर का 'टालेगन-2' और IAEA की संदिग्ध रिपोर्ट 
अमेरिका का मुख्य निशाना तेहरान के पास स्थित पारचिन सैन्य परिसर के भीतर मौजूद 'टालेगन-2' नामक गुप्त स्थल था। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने साल 2015 की अपनी जांच में यहाँ मानव-निर्मित यूरेनियम के कण पाए थे, जिसके बाद ईरान ने अचानक जांच रोक दी थी और उस पूरी जगह को साफ कर दिया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गुप्त स्थान पर हाइड्रोडायनामिक प्रयोग किए जा रहे थे, जो परमाणु हथियारों में प्लूटोनियम या यूरेनियम को संपीड़ित करने के लिए आवश्यक होते हैं। पिछले 15 सालों से IAEA इस जगह की जांच की कोशिश कर रही थी, जिसे ईरान लगातार टालता रहा, लेकिन अब अमेरिकी बम ने इस विवादित ढांचे को पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है।

​सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा भीषण नुकसान और विशेषज्ञों का विश्लेषण 
9 और 10 मार्च को हुए इस प्रहार के बाद जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों ने टालेगन-2 स्थल पर हुए भारी नुकसान की पुष्टि कर दी है। अमेरिकी थिंक टैंक 'मिडलबरी इंस्टीट्यूट' और 'इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी' (ISIS) के विशेषज्ञ डेविड अलब्राइट ने इन तस्वीरों का गहराई से विश्लेषण किया है।

तस्वीरों में जमीन पर तीन बड़े और गहरे छेद साफ देखे जा सकते हैं, जो सीधे तौर पर 'बंकर बस्टर' बम की मार का परिणाम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रहार ने ईरान की उन प्रयोगशालाओं और कीमती उपकरणों को पूरी तरह नष्ट कर दिया होगा जिनका उपयोग परमाणु हथियार के परीक्षण के लिए किया जा रहा था।

​ईरान के सामने अब दो कठिन रास्ते: आत्मसमर्पण या गुप्त परमाणु निर्माण 
इस भीषण प्रहार के बाद ईरान का परमाणु विकल्प लगभग खत्म होता नजर आ रहा है, जिससे उसके सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब ईरान के पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं: या तो वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे सरेंडर कर दे, या फिर बची-कुची गुप्त जगहों पर और भी अधिक तेजी से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करे।

हालांकि, खुफिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान का शासन अभी गिरा नहीं है और उसकी सेना के 31 कमांडो ग्रुप निरंतर काम कर रहे हैं, जो यह संकेत देते हैं कि ईरान अभी पूरी तरह घुटने टेकने के मूड में नहीं है और वह पलटवार की तैयारी कर सकता है।

​क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा संकट और युद्ध के बढ़ते आर्थिक प्रभाव 
यह युद्ध अब विशुद्ध रूप से 'परमाणु भौतिकी' का संघर्ष बन चुका है, जहाँ भौतिक विज्ञान के नियम किसी कूटनीतिक समझौते को स्वीकार नहीं करते। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज छह दिनों के भीतर इस युद्ध पर अमेरिका 11.3 अरब डॉलर खर्च कर चुका है।

ओमान के बंदरगाह आग की लपटों में घिरे हैं और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या 138 से घटकर प्रतिदिन केवल 8 रह गई है। वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर भारी मंदी और महंगाई का खतरा मंडराने लगा है।

​भविष्य की अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती चिंता 
इस हमले ने ईरान की परमाणु सुरक्षा और उसकी सैन्य प्रतिरोधक क्षमता को गंभीर चोट पहुँचाई है। इजरायल और अन्य पश्चिमी देश जो पहले यह सोचते थे कि ईरान परमाणु हथियार बनाने से अभी कई महीने दूर है, वे अब और अधिक सतर्क हो गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह डर सता रहा है कि यदि ईरान ने अपनी सुरक्षा खतरे में महसूस की और उसे लगा कि उसकी परमाणु सुरक्षा खत्म हो गई है, तो वह गुप्त ठिकानों पर अपनी परमाणु गतिविधियों को और भी आक्रामक बना सकता है। यह स्थिति आने वाले समय में दुनिया के लिए अब तक का सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा साबित हो सकती है।

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