Israel Iran War Day 19: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग अब 19वें दिन और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। इजराइल के ताजा हमले में ईरान के वरिष्ठ रणनीतिकार और पूर्व सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी तथा उनके बेटे की मौत हो गई। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर गोलामरेजा सुलेमानी के भी मारे जाने की खबर है।
इसके बाद ईरान ने बदले की कार्रवाई करते हुए इजराइल की राजधानी तेल अवीव पर 100 से ज्यादा मिसाइलों से हमला कर दिया। ईरान का दावा है कि क्लस्टर वारहेड वाली इन मिसाइलों को इजराइल का आयरन डोम डिफेंस सिस्टम भी नहीं रोक पाया।
वहीं इजराइल ने कहा कि मिसाइलों के मलबे की चपेट में आने से एक महिला की मौत हुई है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और नाटो देशों की बेरुखी ने युद्ध को और जटिल बना दिया है।
तेहरान ने तोड़ी चुप्पी: लारिजानी की मौत पर लगी आधिकारिक मुहर
काफी समय तक सस्पेंस बने रहने के बाद आखिरकार ईरानी मीडिया और समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने लारिजानी की मौत की पुष्टि कर दी है। इजराइल ने इसे अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य सफलता करार दिया है।
लारिजानी न केवल सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व प्रमुख थे, बल्कि वे सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार भी माने जाते थे। उनकी मौत को ईरान के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
ईरान का खौफनाक पलटवार: तेल अवीव पर 100 से ज्यादा मिसाइलों से हमला
अपने सबसे बड़े कमांडर की मौत का बदला लेने के लिए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने इजराइल की राजधानी तेल अवीव पर भीषण हमला बोल दिया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने 100 से ज्यादा ठिकानों पर क्लस्टर वारहेड वाली मिसाइलों से हमला किया है।
ईरान का यह भी दावा है कि इजराइल का मजबूत 'आयरन डोम' डिफेंस सिस्टम इन मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा। इस हमले के मलबे की चपेट में आने से इजराइल में एक महिला की मौत की खबर भी सामने आई है।
कौन थे अली लारिजानी ?
अली लारिजानी ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के 'चाणक्य' माने जाते थे। वे संसद के पूर्व स्पीकर और परमाणु वार्ता के मुख्य रणनीतिकार रह चुके थे। इस युद्ध में ईरान के बड़े फैसलों के पीछे लारिजानी का ही दिमाग माना जाता था। उनकी मौत और सैन्य ढांचे को हुए भारी नुकसान ने तेहरान को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।
ट्रंप का बयान और नाटो देशों की बेरुखी
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि नाटो (NATO) के ज्यादातर देश ईरान के खिलाफ इस सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ नहीं देना चाहते।
ट्रंप लगातार ईरान पर कड़े हमले करने की वकालत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने पुराने सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। उधर, अपनी मौत से पहले लारिजानी ने भी मुस्लिम देशों द्वारा अपेक्षित सहयोग न मिलने पर गहरी निराशा व्यक्त की थी।