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ईरान ने इजरायल के डिमोना और अराद पर मिसाइलों से भीषण हमला किया है। डिमोना परमाणु केंद्र के पास हुए इन धमाकों में कई इमारतें जमींदोज हो गई हैं। इस हमले में 100 से अधिक लोग घायल हो गए।

Iran-Israel War: पश्चिम एशिया में युद्ध की आग अब रिहायशी और संवेदनशील इलाकों तक पहुंच गई है। ईरान ने शनिवार रात इजरायल के दक्षिणी शहरों डिमोना (Dimona) और अराद (Arad) पर मिसाइलों की बौछार कर दी। यह हमला ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र पर हुए पिछले हमले के जवाब में की गई जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है।

डिमोना परमाणु केंद्र के पास तबाही
इजरायल का मुख्य परमाणु अनुसंधान केंद्र डिमोना शहर से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मिसाइल गिरने के बाद हुए धमाकों से शहर की इमारतों की खिड़कियां चकनाचूर हो गई हैं और सड़कों पर मलबे का ढेर लग गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए फुटेज में दिख रहा है कि धमाके इतने शक्तिशाली थे कि लोगों के घरों के दरवाजे और खिड़कियों के फ्रेम तक उखड़ गए।

100 से ज्यादा लोग घायल
मिसाइल हमलों ने अराद शहर में कम से कम 84 लोगों को घायल कर दिया है, जिनमें से 10 की हालत नाजुक बताई जा रही है। वहीं डिमोना में एक 10 साल के बच्चे और एक महिला समेत 33 लोग घायल हुए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्थिति को देश के लिए "बेहद कठिन" बताया है और प्रभावित क्षेत्रों में और अधिक बचाव दल भेजने का आश्वासन दिया है।

ईरान ने दी कड़ी चेतावनी
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अगर इजरायल डिमोना जैसे सुरक्षित क्षेत्र में भी मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा है, तो यह युद्ध के एक नए चरण में प्रवेश करने का संकेत है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि उन्होंने कुवैत और यूएई में भी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

परमाणु खतरे पर IAEA की रिपोर्ट
चूंकि डिमोना इजरायल के परमाणु अनुसंधान का केंद्र है, इसलिए दुनिया भर में परमाणु रिसाव का डर पैदा हो गया था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने स्पष्ट किया है कि इजरायल के परमाणु बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है और क्षेत्र में रेडिएशन का स्तर सामान्य है।

इजरायल ने आधिकारिक तौर पर कभी अपने परमाणु हथियारों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन डिमोना को 1958 से ही देश के परमाणु कार्यक्रम का मुख्य केंद्र माना जाता है, जिससे इसकी सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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