लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर फिल्म ‘धुरंधर-2’ को लेकर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपी में माफिया राज के खिलाफ मिली सफलता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दृढ़ संकल्प और उनकी अपराध के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का नतीजा है।
प्रशांत कुमार ने इस बड़ी सफलता का असली श्रेय उन जमीनी पुलिसकर्मियों, अधिकारियों और सिपाहियों को दिया जो जोखिम उठाकर मैदान में डटे रहे। उन्होंने उन्हीं जांबाज पुलिसकर्मियों को असली ‘धुरंधर’ करार दिया है।
Humbled by this generous mention. Whatever we achieved against the mafia was only possible under the visionary leadership of Hon’ble CM UP Sri @myogiadityanth ji — his zero-tolerance resolve gave us both direction and courage.
— Dr. Prashant Kumar IPS Retd. (@PrashantK_IPS90) March 21, 2026
The real credit belongs to every officer, every… https://t.co/Lh8cegn81Q
अतीक-अशरफ कांड और माफिया नेटवर्क
फ़िल्म ‘धुरंधर-2’ में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के पतन से जुड़े घटनाक्रमों को प्रमुखता से दिखाया गया है। फिल्म की कहानी पाकिस्तान के ल्यारी अंडरवर्ल्ड से लेकर उत्तर प्रदेश के गहरे माफिया नेटवर्क तक के तार जोड़ती है।
इसमें दर्शाया गया है कि कैसे एक दौर में अपराध और राजनीति का अटूट गठजोड़ था, जिसे योगी सरकार के दौरान चलाए गए विशेष अभियानों ने जड़ से उखाड़ फेंका। फिल्म में प्रयागराज की उस चर्चित घटना का भी उल्लेख है जिसने देश भर का ध्यान यूपी की कानून व्यवस्था की ओर खींचा था।
पूर्व DGP प्रशांत कुमार से प्रेरित किरदार और 'द एनफोर्सर' का जिक्र
फिल्म में एक ऐसे सशक्त पुलिस अधिकारी का किरदार है जो पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार के व्यक्तित्व और कार्यशैली से प्रेरित बताया जा रहा है। अनिरुद्ध मित्रा द्वारा उन पर लिखी गई पुस्तक ‘द एनफोर्सर’ की तर्ज पर फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे पुलिस नेतृत्व ने माफियाओं के आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त किया।
प्रशांत कुमार के कार्यकाल को यूपी में अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई और अपराधियों के मनोबल को तोड़ने वाले दौर के रूप में रेखांकित किया गया है।
प्रशासनिक इच्छाशक्ति और पुलिस की सख्ती का नया अध्याय
यह फिल्म केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में आए प्रशासनिक बदलाव की गाथा के रूप में देखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म यह संदेश देती है कि जब राजनीतिक नेतृत्व और पुलिस प्रशासन एक साथ मजबूत इच्छाशक्ति दिखाते हैं, तो संगठित अपराध की कमर तोड़ी जा सकती है।
हाई-इंटेंसिटी पुलिस कार्रवाई और अपराधियों पर निरंतर दबाव ने प्रदेश में आम जनता के बीच कानून के प्रति विश्वास को मजबूत किया है। फिल्म ‘धुरंधर-2’ इसी बदलाव और माफियाराज के अंत के नए अध्याय को पर्दे पर उतारती है।









