नई दिल्ली : भारत और अमेरिका ने आज 07 फरवरी 2026 को अपने अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) का आधिकारिक फ्रेमवर्क सार्वजनिक कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई इस ऐतिहासिक साझेदारी के तहत दोनों देशों ने टैरिफ की बाधाओं को कम करने और व्यापार को नई दिशा देने पर मुहर लगा दी है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि इस फ्रेमवर्क में देश के किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है।
अंतरिम समझौते का फ्रेमवर्क और टैरिफ में रियायत
जारी किए गए नए फ्रेमवर्क के तहत, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने का बड़ा फैसला लिया है।
यह 32% की कटौती भारतीय निर्यातकों, विशेषकर MSMEs के लिए $30 ट्रिलियन के अमेरिकी बाजार के रास्ते खोल देगी। इसके बदले में, भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों और चुनिंदा कृषि उत्पादों पर अपने आयात शुल्क को कम या खत्म करने के लिए सहमत हुआ है।
कृषि और डेयरी सेक्टर को 'सुरक्षा कवच'
फ्रेमवर्क की सबसे बड़ी बात यह है कि भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी सेक्टर में कोई समझौता नहीं किया है। गेहूं, चावल, मक्का, सोया, दूध, पनीर और पोल्ट्री जैसे उत्पादों को 'प्रोटेक्टेड' कैटेगरी में रखा गया है।
पीयूष गोयल के मुताबिक, इन क्षेत्रों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी गई है ताकि करोड़ों भारतीय किसानों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
$500 अरब की मेगा खरीद और रूसी तेल पर रुख
फ्रेमवर्क में भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से $500 अरब मूल्य के सामान खरीदने का इरादा जताया है। इसमें ऊर्जा उत्पाद एयरक्राफ्ट पार्ट्स, कीमती धातुएं और कोकिंग कोल शामिल हैं।
अमेरिकी दावों के अनुसार, भारत अपने ऊर्जा आयात को रूस से हटाकर अमेरिका और वेनेजुएला की ओर स्थानांतरित करेगा, जिससे द्विपक्षीय व्यापार घाटे को संतुलित करने में मदद मिलेगी।
हाई-टेक और फार्मा सेक्टर को बूस्ट
इस समझौते के तहत जेनेरिक दवाओं (Pharmaceuticals), रत्नों और आभूषणों (Gems & Diamonds) और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर टैरिफ को शून्य (Zero) करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा, दोनों देश डेटा सेंटर्स, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) और अन्य तकनीकी उत्पादों के व्यापार को सुगम बनाने के लिए 'नॉन-टैरिफ बैरियर्स' को हटाने पर भी सहमत हुए हैं।











