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राजिम कुंभ कल्प मेले को लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता टीकमचंद साहू ने मौजूदा व्यवस्थाओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि, इवेंट सिस्टम ने राजिम कुंभ मेले का सत्यानाश कर दिया। 

श्यामकिशोर शर्मा। नवापारा-राजिम। राजिम कुंभ कल्प मेले को लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता टीकमचंद साहू ने मौजूदा व्यवस्थाओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह मेला वर्ष 2004 में तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में प्रारंभ हुआ था और उस समय के प्रभावशाली मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के प्रयासों से इस धार्मिक आयोजन ने देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई थी। 

श्री साहू ने कहा कि उस दौर में राजिम कुंभ कल्प मेला केवल आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और रोजगार का महासंगम हुआ करता था। देशभर से साधु-संतों की मानो बाढ़ आ जाती थी। शंकराचार्य, महामंडलेश्वर और अनेक प्रतिष्ठित संतों का आगमन होता था, जिससे मेले की गरिमा अपने चरम पर रहती थी। उन्होंने कहा कि उस समय मंच, टेंट, भोजन, साज-सज्जा से लेकर हर कार्य में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाती थी, जिससे हजारों परिवारों को सीधा रोजगार मिलता था। मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया था। इस बार इवेंट ने सब कुछ बिगाड़ दिया। मौजूदा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए टीकमचंद साहू ने कहा कि इस बार मेले को इवेंट सिस्टम के हवाले कर दिया गया, जिसने पूरे स्वरूप का सत्यानाश कर दिया है। 

मेले में नहीं है किसी भी प्रकार का कोई माहौल 
उन्होंने आरोप लगाया कि न तो साधु-संतों जैसा माहौल रहा, न ही आम श्रद्धालुओं की सहभागिता दिख रही है और न ही स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मेले की आत्मा गायब नजर आ रही है। कार्यक्रमों में भीड़ नहीं है, व्यवस्था अव्यवस्थित है और मंदिर क्षेत्र को हाशिए पर डाल दिया गया है। 

स्थानीय लोगों को भागीदारी देने की मांग 
टीकमचंद साहू ने प्रशासन और सरकार से मांग की कि राजिम कुंभ कल्प मेले को फिर से उसकी मूल परंपरा और स्वरूप में लौटाया जाए। स्थानीय लोगों को भागीदारी दी जाए और बाहरी इवेंट संस्कृति पर पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो जनता का आक्रोश और गहराएगा।

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