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ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो गई है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार पहुंचने के बाद पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, चीन और जापान समेत कई एशियाई देशों ने ऊर्जा बचत के कड़े कदम उठाए हैं।

Iran-US-Israel War Impact: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच जारी युद्ध का असर अब पूरे एशिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर से उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।

इस ऊर्जा संकट के चलते भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, जापान और थाईलैंड सहित कई एशियाई देशों को आपातकालीन फैसले लेने पड़े हैं। कहीं सरकारी दफ्तरों का समय घटाया जा रहा है, कहीं ईंधन की राशनिंग हो रही है, तो कहीं रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। यह संकट दिखा रहा है कि मिडिल-ईस्ट का यह युद्ध अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।

​पाकिस्तान में आर्थिक इमरजेंसी और मंत्रियों के वेतन पर रोक 
​पड़ोसी देश पाकिस्तान में बढ़ती तेल कीमतों और ईंधन की किल्लत को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक व्यापक कटौती योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत सरकारी दफ्तर अब हफ्ते में केवल चार दिन ही खुलेंगे और आधे कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया गया है।

खर्चों को कम करने के लिए मंत्रियों और सलाहकारों के विदेश दौरों पर पूर्ण रोक लगा दी गई है और मंत्रियों को अगले दो महीने तक वेतन न लेने का आदेश दिया गया है, जबकि सांसदों की सैलरी में भी 25% की भारी कटौती की गई है।

इसके अतिरिक्त सरकारी गाड़ियों के ईंधन को 50% तक कम कर दिया गया है ताकि घटते विदेशी मुद्रा भंडार को तेल आयात के भारी बोझ से बचाया जा सके।

​बांग्लादेश में यूनिवर्सिटीज बंद और ईंधन की कड़ी राशनिंग
​बांग्लादेश सरकार ने बिजली और ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए सोमवार से देश की सभी यूनिवर्सिटीज को बंद करने का कड़ा आदेश जारी कर दिया है। ईंधन की कमी की आशंका के चलते जनता में मची घबराहट और जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने दैनिक फ्यूल बिक्री पर सख्त लिमिट लगा दी है।

इस ऊर्जा संकट का सबसे बुरा असर उद्योगों पर पड़ा है, जहाँ गैस की भारी कमी के कारण कई उर्वरक फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा बचाने के लिए और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

​थाईलैंड में लिफ्ट के इस्तेमाल पर रोक और AC पर सख्त पहरा
​थाईलैंड सरकार ने ऊर्जा बचत के लिए अपने कर्मचारियों को बेहद अनूठे और सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकारी दफ्तरों में अब लिफ्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है और कर्मचारियों को सीढ़ियों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही दफ्तरों में एयर कंडीशनर का तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने का निर्देश दिया गया है ताकि बिजली की खपत को न्यूनतम किया जा सके।

अधिकारियों को सूट-टाई जैसे औपचारिक कपड़ों की जगह शॉर्ट स्लीव शर्ट पहनने को कहा गया है ताकि गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सके और एसी की निर्भरता घटे। सरकार अब अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से अतिरिक्त एलएनजी खरीदने की कोशिशों में जुटी है।

​भारत में कमर्शियल गैस सप्लाई ठप और होटलों पर संकट
​भारत के कई राज्यों में एलपीजी की किल्लत ने एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है, जिससे दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। सरकार ने तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे कमर्शियल के बजाय घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी का उत्पादन बढ़ाएं ताकि आम घरों की रसोई प्रभावित न हो।

गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट और होटल बंद होने की कगार पर पहुँच गए हैं, जिससे पर्यटन और खाद्य उद्योग को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। भारत अपनी वार्षिक एलपीजी खपत का करीब 67% हिस्सा आयात करता है, इसलिए मिडिल-ईस्ट का यह युद्ध सीधे तौर पर देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है।

​चीन और जापान ने रणनीतिक तेल भंडार से शुरू की निकासी
​दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल चीन और जापान ने अपने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग करना शुरू कर दिया है। चीन ने संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है और अपनी रिफाइनरियों को नए फ्यूल एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट साइन न करने के निर्देश दिए हैं ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो।

वहीं जापान सरकार ने राष्ट्रीय तेल भंडारण केंद्रों को जरूरत पड़ने पर कच्चा तेल जारी करने के लिए अलर्ट मोड पर रखा है। जापान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर वैश्विक सप्लाई में बाधा लंबे समय तक रहती है, तो उसके घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की किल्लत न होने पाए।

​साउथ कोरिया में प्राइस कैप और वियतनाम में वर्क फ्रॉम होम
​साउथ कोरिया सरकार ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए करीब तीन दशक बाद पहली बार 'प्राइस कैप' लगाने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने कहा है कि यह कदम आम उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत देने के लिए उठाया जा रहा है और साथ ही सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रही है जो होर्मुज के रास्ते पर निर्भर न हों।

दूसरी ओर वियतनाम सरकार ने कंपनियों से अपील की है कि वे अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दें ताकि दफ्तर आने-जाने में होने वाली ईंधन की खपत को कम किया जा सके।

इंडोनेशिया ने भी जनता पर बोझ कम करने के लिए फ्यूल सब्सिडी बढ़ा दी है और डीजल में 50% पाम ऑयल आधारित बॉयोडीजल मिलाने के कार्यक्रम पर विचार शुरू किया है।

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