नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है क्योंकि तुर्की अब ईरान के खिलाफ खुलकर सीधी जंग में उतर आया है।
तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उसने पूर्वी भूमध्य सागर में ईरान द्वारा दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही इंटरसेप्ट कर समंदर में दफन कर दिया है। तुर्की की इस सक्रिय एंट्री ने अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई को अब पूरे इलाके में फैला दिया है।
#BREAKING 🇹🇷🇮🇷 Turkey intercepts Iranian missile over Gaziantep again
— Prime (@nucleusprime) March 9, 2026
Iran is hitting NATO territory.
Gaziantep. 2 million people. Article 5 territory.
The alliance hasn’t invoked it yet.
How long can they wait? pic.twitter.com/xvVW3942oa
ईरानी खतरों को देखते हुए तुर्की ने अपनी सैन्य तैयारियों को और अधिक पुख्ता करते हुए अपने नियंत्रण वाले उत्तरी साइप्रस में 6 एफ-16 (F-16) फाइटर जेट्स और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिए हैं।
तुर्की को यह डर सता रहा है कि ईरान या उसके समर्थक संगठन उत्तरी साइप्रस में स्थित उसके ठिकानों को निशाना बना सकते हैं, इसलिए इलाके की सुरक्षा मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
NATO Intercepts Second Iranian Missile Entering Turkey’s Airspace, Defense Ministry Says: It was the second time in six days that Turkey announced the interception of a missile from Iran. - The New York Times https://t.co/t5ruDACpPg
— Steve Williams (@HISteveWilliams) March 9, 2026
तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वे इलाके की सुरक्षा और आम लोगों की जान जोखिम में डालने वाले कदम न उठाएं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तुर्की की चेतावनियों को मानना सभी के हित में है और अपने हितों की रक्षा के लिए तुर्की बिना किसी झिझक के जरूरी कदम उठाता रहेगा।
इस बीच भूमध्य सागर में स्थित साइप्रस द्वीप अब युद्ध का नया फ्लैशपॉइंट बन गया है, जहाँ 1 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा ब्रिटिश एयरबेस पर किए गए ड्रोन हमलों के बाद ग्रीस ने भी साइप्रस के समर्थन में 4 एफ-16 जेट्स तैनात कर दिए हैं।
तुर्की, जो एक नाटो (NATO) सदस्य और सुन्नी प्रधान मुल्क है, पहले से ही शिया बहुल ईरान के साथ क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा रखता है। अब ईरान और इजरायल-अमेरिका की जंग में तुर्की की इस सक्रिय भूमिका ने वैश्विक कूटनीति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।










