US-Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच लेबनान में इजरायली हमलों के दौरान ‘सफेद फॉस्फोरस’ के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं। कई वीडियो और तस्वीरों में हमलों के बाद आसमान में फैलता सफेद धुआं और तेज जलन जैसी घटनाएं दिखाई दी हैं, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि रिहायशी इलाकों में इस हथियार का इस्तेमाल किया गया है, तो इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर युद्ध अपराध माना जा सकता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सफेद फॉस्फोरस क्या होता है और इसे इतना खतरनाक क्यों माना जाता है।
#Breaking
— ⚡️🌎 World News 🌐⚡️ (@ferozwala) March 9, 2026
Human Rights Watch:
- Israel used white phosphorus shells from the air over homes in the town of #Yahmar in southern Lebanon on March 3 pic.twitter.com/wCtWlniQpl
- The use of white phosphorus over populated areas is illegal under international humanitarian law @hrw…
क्या होता है सफेद फॉस्फोरस?
सफेद फॉस्फोरस एक अत्यधिक सक्रिय रासायनिक पदार्थ होता है, जो मोम जैसा दिखाई देता है और इसमें लहसुन जैसी तीखी गंध होती है। यह पदार्थ हवा में मौजूद ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही अपने-आप जलने लगता है और बहुत अधिक तापमान पैदा करता है।
सैन्य उपयोग में इसे बम, रॉकेट, मोर्टार और ग्रेनेड के जरिए इस्तेमाल किया जाता है। विस्फोट होने के बाद इसके छोटे-छोटे जलते कण आसपास फैल जाते हैं और लंबे समय तक आग पैदा कर सकते हैं।
🚨🇮🇱🇱🇧 Israel Using Banned Chemical Weapon on Lebanese
— Roxom TV (@RoxomTV) March 9, 2026
Human Rights Watch documents unlawful white phosphorus airbursts over Lebanese homes in Yohmor, as 217 civilians are killed across Lebanon. pic.twitter.com/xVjijaXPRf
यह हथियार इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?
सफेद फॉस्फोरस को बेहद खतरनाक हथियार माना जाता है क्योंकि इसके जलते कण तेजी से फैलते हैं और गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
- यह हवा के संपर्क में आते ही जलने लगता है।
- जलते समय बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करता है।
- त्वचा के संपर्क में आने पर गहरे घाव बना सकता है।
- आग तब तक जलती रहती है जब तक ऑक्सीजन मिलती रहती है।
इसी कारण युद्ध क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल बेहद विवादास्पद माना जाता है।
मानव शरीर पर क्या असर पड़ता है?
सफेद फॉस्फोरस के संपर्क में आने से इंसानों को गंभीर शारीरिक नुकसान हो सकता है।
- त्वचा जलकर गहरे घाव बन सकते हैं।
- धुएं के संपर्क में आने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
- आंखों में तेज जलन और नुकसान हो सकता है।
- गंभीर मामलों में यह हड्डियों तक को नुकसान पहुंचा सकता है।
यदि इसके कण शरीर के अंदर चले जाएं तो यह आंतरिक अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
युद्ध में इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
सैन्य रणनीति में सफेद फॉस्फोरस का उपयोग कई कारणों से किया जाता है।
- युद्ध के मैदान में धुएं की दीवार (Smoke Screen) बनाने के लिए
- दुश्मन की गतिविधियों को छिपाने या भ्रम पैदा करने के लिए
- टारगेट को चिन्हित करने के लिए
हालांकि इसका उपयोग आमतौर पर सैन्य उद्देश्यों तक सीमित माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सफेद फॉस्फोरस के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसके इस्तेमाल पर कड़े नियम लागू हैं। 1980 में बने Convention on Certain Conventional Weapons (CCW) के प्रोटोकॉल III के तहत रिहायशी इलाकों में आग लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल प्रतिबंधित माना जाता है। यदि किसी देश द्वारा नागरिक क्षेत्रों में जानबूझकर ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है।
क्यों बढ़ गई है अंतरराष्ट्रीय चिंता?
लेबनान में फॉस्फोरस बम के इस्तेमाल के आरोप सामने आने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसकी जांच की मांग की है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन होगा।










