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मंगलवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में सत्तापक्ष के लिए बड़ी ही असहज सी स्थिति पैदा हो गई। सत्तापक्ष के अनेक सदस्य मौजूद नहीं थे और विपक्ष ने मत विभाजन की मांग रख दी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को उस समय सरकारी पक्ष असहज सा हो गया जब गृह विभाग के अनुदान मांगों पर विपक्ष ने कटौती का प्रस्ताव रखा। मंजूर ना होने पर अनुदान पास करने के लिए विपक्ष ने मत विभाजन की मांग कर दी। दरअसल उस वक्त सत्तापक्ष के कई सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे।

उधर आसंदी ने मत विभाजन की मांग को स्वीकार लिया। बस फिर क्या था, अफरा- तफरी और भगमभाग की नौबत आ गई। जैसे ही मत विभाजन की मांग आसंदी ने स्वीकारी, अफसर और सत्तापक्ष के नेतागण इधर-उधर भागते-दौड़ते दिखे। थोउ़ी ही देर में सत्तापक्ष के सदस्य भागते हुए सदन में पहुंचे। बस तुरंत ही आसंदी ने वोटिंग के की व्यवस्था दे दी। हालांकि संख्याबल सत्तापक्ष के साथ था सो सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की वोटिंग के बाद अनुदान मांगें पास हो गईं। विपक्ष की ओर से 24 और सत्तापक्ष की ओर से 37 वोट पड़े। 

Bhupesh and Mahant

भूपेश और महंत ने गृहमंत्री को घेरा
इससे पहले भी गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सबसे ज्यादा नोक झोक होती रही। खासतौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गृहमंत्री को घेरने का प्रयास करते रहे। उन्होंने इसी दौरान बलरामपुर में भी अफीम की खेती की बात रख दी। नेता प्रतिपक्ष महंत ने भी केंद्र द्वारा सुरक्षाबलों की तैनाती के बदले केंद्र की ओर से पैसों की मांग की बात उठा दी। 

महंत ने केंद्र के पैसे मांगने की बात उठाई
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा- केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य सरकार को पत्र भेज पैसा मांगा है। प्रदेश में अर्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए पैसा माँगा गया है। केंद्र ने छत्तीसगढ़ से 21 हज़ार 530 करोड़ रुपये मांगे हैं। उनहोंने कहा कि, CM साय ने इस राशि को माफ करने के लिए केंद्र को पत्र भी लिखा है। गृह मंत्रालय ने 4 किस्तों में राशि देने की बात कही है। महंत ने पूछा कि, आख़िर राज्य सरकार यह राशि किस बजट से देगी? उन्होंने कहा कि, UPA सरकार में केंद्र से राशि नहीं माँगी जाती थी।

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