रायपुर। शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला महाविद्यालय में 'स्वयं सिद्धा' के रूप में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. जया तिवारी ने कहा कि, सशक्त नारी स्वयं सिद्धा है। संघर्ष ही सफलता की कुंजी है।
उन्होंने कहा कि, 1950-70 में महिला विकास की चर्चा होती रही। वर्तमान में सामाजिक समानता की बात हो रही है। आज नारी अलग-अलग सोपानों को पार करती हुई निरंतर आगे बढ रही है। महिला दिवस प्रतीक के रूप में लेना चाहिए और अपनी बौद्धिक क्षमता के साथ ही अपने काम से यह साबित करें कि, आप समान हैं और कई मायनों में श्रेष्ठ हैं। लैंगिक समानता मिलनी चाहिए। खुद के सौंदर्य पर नाज़ तो हो पर संसार के सौंदर्य को भी स्वीकारें और मन को भी सुंदर बनाएं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा सभी का मन
वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. वैभव आचार्य ने कहा कि, जमीन से अंतरिक्ष तक महिलाओं का ही वर्चस्व है। इस अवसर पर साँस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। एकल गायन, कोमल हैं कमजोर नहीं, कमलेश्वरी ने प्रस्तुत किया। भाषण में पद्मश्री ने आर्थिक, सामाजिक, साँस्कृतिक, राजनैतिक, सशक्तिकरण की बात कही। नारी का मौन लज्जा, कहलाता है, यही लज्जा घरेलू हिंसा का शिकार बन जाती है। उसने कहा- तू खुद की खोज में निकल, तू किस लिए उदास है, तेरे वजूद की समय को भी तलाश है, महिला तो क्रांति की मशाल है।
डॉ. ऋचा शर्मा ने प्रस्तुत की स्वरचित कविता
डॉ. ऋचा शर्मा ने स्वरचित कविता प्रस्तुत की जिसका शीर्षक 'कवि की कल्पना है' था। महाविद्यालय की छात्रा अदिति शुक्ला ने बताया कि, इतिहास बदलने के लिए हिम्मत और कलम दोनों उठानी पड़ती है। नारी हर रूप में पूजनीय है, सम्माननीय है। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. अलका वर्मा ने नारी के परंपरागत सौंदर्य और उसके साहस का उल्लेख किया। डॉ. रेखा दीवान ने सफल मंच संचालन करते हुए कहा कि नारी के कौशल और उसकी बौद्धिक क्षमता पर प्रकाश डाला।

स्त्री सौंदर्य है, पुष्प की सुगंधि है : डा. कल्पना मिश्रा
धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ. कल्पना मिश्रा ने कहा- महिला दिवस अस्तित्व का उत्सव है, पुरुष युद्ध करते हैं और उनके जख्मों पर मरहम है स्त्री, स्त्री सौंदर्य है, वह पुष्प की सुगंधि है, स्त्रियों के बिना इस सृष्टि में कुछ भी संभव नहीं है। डॉ. स्वप्निल कर्महे के मार्गदर्शन में नुक्कड़ नाटक और समूह नृत्य के माध्यम से छात्राओं ने बहुत सुंदर प्रस्तुति दी। अदिति प्रधान, नेहा नायक, सिद्धि तिवारी, कात्यायनी साव, रिया कुमारी ने महिलाओं की समस्या और समाधान को नाट्य और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। प्रिया देवांगन ने आयोजन में सहयोग किया। सभी राध्यापक और छात्राएं उपस्थित रहीं।









