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Aditya L1 Captures strongest Solar Eruptive: इसरो ने बताया कि अपनी ताकत के हिसाब से यह 2003 के बाद से सबसे बड़ा भू-चुंबकीय तूफान है। क्योंकि सूर्य पर भड़कने वाला क्षेत्र 1859 में हुई ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण कैरिंगटन घटना जितना बड़ा था। 

Aditya L1 Captures strongest Solar Eruptive: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के आदित्य एल वन ने पृथ्वी की तरफ सूरज से आने वाले सौर तूफान की लहरों को कैद किया है। इसे 50 सालों में सबसे विशालकाय और सबसे ताकतवर सौर लहर बताया जा रहा है। यह विस्फोट X8.7 तीव्रता का था। आधी सदी में पहली बार इतनी तगड़ी सौर लहर सूरज से निकली, वो भी उस धब्बे से जहां 11 मई से 13 मई के बीच दो बार धमाका हुआ था। आदित्य एल 1 ने 11 मई, शनिवार को इस लहर को कैप्चर किया है। तब इसकी तीव्रता X5.8 थी।     

अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने कहा है कि उन्होंने इस घटना के साइन को रिकॉर्ड करने के लिए अपने सभी ऑब्जर्वेशन प्लेटफार्मों और सिस्टम को जुटाया है, जो दो दशकों में सौर गतिविधि के कारण सबसे बड़ा भू-चुंबकीय तूफान है। इसरो ने एक बयान में कहा कि आदित्य-एल1 और चंद्रयान-2 दोनों ने इस तूफान को कैप्चर किया है। इसके प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। 

सौर लहरों की चपेट में भारत नहीं
इसरो ने बताया कि अपनी ताकत के हिसाब से यह 2003 के बाद से सबसे बड़ा भू-चुंबकीय तूफान है। क्योंकि सूर्य पर भड़कने वाला क्षेत्र 1859 में हुई ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण कैरिंगटन घटना जितना बड़ा था। 

इसरो के मुताबिक भारत और उसके आसपास का इलाका सौर तूफान की चपेट में नहीं आया है। ज्यादातर दिक्कत अमेरिकी और प्रशांत महासागर के ऊपरी इलाकों में थी। इसरो के इस ऑब्जर्वेशन को नासा ने भी पुष्ट किया है। 

ज्यादातर धमाके एक ही स्पॉट से
11 मई से 14 मई के बीच सूरज में तीन बड़े धमाके हुए हैं। ज्यादातर धमाके एक ही स्पॉट से हुए। यही वजह है कि इस वीकेंड पर भयानक सौर तूफान आया। सूरज में अभी भी धमाका हो रहा है। 10 मई को सूरज में एक एक्टिव धब्बा दिखा था। इसे AR3664 नाम दिया गया है। फिर इसमें एक धमाका हुआ। सूरज की एक लहर धरती की तरफ बढ़ रही है। यह X5. क्लास की सौर लहर थी। इस समय सूरज पर जिस जगह बड़ा सन स्पॉट बना हुआ है, वो धरती की चौड़ाई से 17 गुना अधिक है। सूरज की तीव्र लहरों की वजह से धरती के उत्तरी ध्रुव वाले इलाके में वायुमंडल सुपरचार्ज हो गया। जिससे पूरे उत्तरी गोलार्ध में कई जगहों पर नॉर्दन लाइट्स देखने को मिलीं। 

क्या होता है क्लास, आगे क्या होगा?
सूरज काफी एक्टिव है। इससे जियोमैग्नेटिक तूफान आ रहे हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में एम क्लास और एक्स क्लास के फ्लेयर्स यानी सौर लहर कहा जाता है। सूरज अगले 8 सालों तक इतना ही एक्टिव रहेगा। इस वजह से सौर तूफान के आने की आशंका बनी रहेगी।

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