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2027 के चुनावों को देखते हुए संगठन नए और प्रभावशाली चेहरों को सरकार में शामिल कर क्षेत्रीय और जातीय समीकरण दुरुस्त करना चाहता है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार जल्द होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार भाजपा हाईकमान यूपी में 'गुजरात मॉडल' अपनाने जा रहा है, जिसके तहत खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

परफॉरमेंस और फीडबैक के आधार पर गिरेगी गाज

​इस मंत्रिमंडल विस्तार में करीब 12 से अधिक मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें पद से हटाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि संगठन ने मंत्रियों के कामकाज का एक विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया है। जिन मंत्रियों के खिलाफ जनता में नाराजगी है या जिनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, उन्हें संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

क्या है 'गुजरात मॉडल' और यूपी में इसकी जरूरत?

​गुजरात में भाजपा ने चुनाव से पहले पूरी की पूरी कैबिनेट बदल दी थी, ताकि सत्ता विरोधी लहर को कम किया जा सके। यूपी में भी 2027 के विधानसभा चुनाव और हालिया सियासी समीकरणों को देखते हुए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए नए, ऊर्जावान चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने की योजना है। इसमें युवाओं और ओबीसी-दलित चेहरों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

नए चेहरों को मिल सकती है जगह

​राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में उन विधायकों को तरजीह दी जाएगी जिन्होंने पिछले चुनावों में अपने क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत स्थिति में रखा। साथ ही, कुछ विधान परिषद सदस्यों को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य सरकार की छवि को और अधिक जन-हितैषी बनाना है।

आगामी चुनावों को लेकर दिल्ली में हुई बड़ी बैठक

​मंत्रिमंडल विस्तार की पटकथा दिल्ली में हुई आलाकमान की बैठकों में लिखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया दिल्ली यात्रा के दौरान अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ हुई चर्चा में इन नामों पर अंतिम मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। जल्द ही राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह की तारीखों का ऐलान हो सकता है।

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