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उत्तर प्रदेश में बेमौसमी बारिश और आंधी ने भीषण तबाही मचाई है, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई। सीएम योगी ने अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर मुआवजा देने और किसानों की फसल का सर्वे करने का आदेश दिया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पिछले 48 घंटों के दौरान विभिन्न जिलों में आंधी-बारिश और बिजली गिरने से भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। सबसे हृदयविदारक घटना सीतापुर में हुई, जहां बिजली गिरने से एक घर में आग लग गई और मां-बेटी जिंदा जल गईं।

कानपुर में धूल भरी आंधी के बाद हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया; यहां पेड़ गिरने से एक ऑटो ड्राइवर और महिला की मौत हो गई।

प्रदेश के अन्य हिस्सों जैसे वाराणसी, चित्रकूट और ललितपुर में भी मौतें दर्ज की गई हैं। कानपुर में अकेले 200 से ज्यादा पेड़ और बिजली के पोल उखड़ गए, जिससे कई इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही।

​मौसम विभाग की चेतावनी: 7 अप्रैल से फिर बदलेगा मिजाज 
लखनऊ मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अतुल सिंह के अनुसार, वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। हालांकि आज और कल कुछ जगहों पर मौसम शुष्क रह सकता है, लेकिन 7 अप्रैल 2026 से एक नया और अधिक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा।

इसके प्रभाव से 7 से 9 अप्रैल के बीच उत्तर प्रदेश के 23 जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।

​सीएम योगी के सख्त निर्देश: 24 घंटे में मिले मुआवजा 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा की स्थिति का संज्ञान लेते हुए सभी जिलाधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जनहानि, पशुहानि या घायल होने की स्थिति में 24 घंटे के भीतर सहायता राशि प्रदान की जाए।

मुख्यमंत्री ने राजस्व और कृषि विभाग को बीमा कंपनियों के साथ मिलकर संयुक्त सर्वे करने और फसल नुकसान की रिपोर्ट जल्द सौंपने को कहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अफसर स्वयं फील्ड में उतरकर किसानों की मदद सुनिश्चित करें।

​किसानों के लिए जरूरी जानकारी और हेल्पलाइन
बेमौसमी बारिश से गेहूं और सरसों की तैयार फसल को भारी नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने किसानों के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं:

बीमा दावा: जिन किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया है, वे नुकसान के 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कटाई के बाद सुरक्षा: यदि फसल काटकर खेत में रखी है, तो वह भी 14 दिनों तक बीमा कवर के दायरे में रहती है।

राजस्व सहायता: गैर-बीमित किसान सीधे तहसील या कृषि विभाग के कार्यालय में रिपोर्ट कर सकते हैं ताकि उन्हें सरकारी कोष से मुआवजा मिल सके।

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