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कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी कर कहा कि सरकार ने केवल राजस्व बढ़ाने के लिए जनता की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से समझौता किया है। गुरुग्राम, फरीदाबाद और करनाल जैसे बड़े शहरों की आरडब्ल्यूए इस नीति का पुरजोर विरोध कर रही हैं।

हरियाणा के शहरी क्षेत्रों, विशेषकर गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे महानगरों में रिहायशी प्लॉट्स पर स्टिल्ट प्लस चार (S+4) मंजिला इमारतों के निर्माण को लेकर छिड़ा विवाद अब कानूनी चौखट तक पहुंच गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस नीति पर कड़ा रुख अपनाते हुए फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का विरोध न केवल अदालतों में हो रहा है, बल्कि प्रदेश के 5 प्रमुख शहरों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, रोहतक और करनाल की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWA) भी इसके खिलाफ सड़क पर हैं। 

ये है विवाद की जड़ 
हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने 2 जुलाई 2024 को एक अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत मकान मालिकों को अपने प्लॉट्स पर चार मंजिल तक निर्माण करने की अनुमति दी गई थी। साथ ही नीति में यह प्रावधान भी था कि यदि किसी ने पहले से अवैध रूप से अतिरिक्त मंजिल बना ली है, तो वह सरकार को निर्धारित शुल्क (Compounding Fee) देकर उसे वैध करवा सकता है। विशेषज्ञों का आरोप है कि सरकार ने बुनियादी सुविधाओं की क्षमता जांचे बिना केवल राजस्व जुटाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया।  

हाईकोर्ट की रोक के 5 प्रमुख कारण 
आर्किटेक्चर और शहरी नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार इस नीति में कई ऐसी खामियां थीं जो भविष्य में शहरों के लिए बड़ा संकट बन सकती हैं। 
1. विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डालना
जून 2023 में सरकार द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में S+4 पॉलिसी लागू करने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें और सुरक्षा मानक तय किए गए थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि 2024 की नीति जारी करते समय इन महत्वपूर्ण तकनीकी सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

2. 'राजस्व बनाम सुरक्षा' का संघर्ष
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी की। अदालत ने माना कि सरकार ने आर्थिक लाभ (Revenue) को प्राथमिकता दी और जन सुरक्षा (Public Safety) से समझौता किया। अधिक मंजिलों और बढ़ती जनसंख्या घनत्व के कारण आगजनी या भूकंप जैसी आपातकालीन स्थितियों में बचाव कार्य करना लगभग असंभव हो जाएगा।

3. कागजी सड़कें और जमीनी हकीकत 
कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के कई सेक्टरों में सड़कें दस्तावेजों पर तो 10 से 12 मीटर चौड़ी दिखाई गई हैं, लेकिन वास्तव में वहां अतिक्रमण और अन्य कारणों से चलने योग्य सड़क मात्र 4 मीटर के आसपास ही बची है। इतनी संकरी गलियों में चार मंजिला इमारतों के बनने से ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या विकराल रूप ले लेगी। 

4. इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट का अभाव 
हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी क्षेत्र में निर्माण की सीमा बढ़ाने से पहले वहां की बिजली, पानी और सीवरेज व्यवस्था का 'वैज्ञानिक अध्ययन' या 'इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट' होना अनिवार्य था। बिना यह जाने कि क्या मौजूदा पाइपलाइनें और सड़कें दोगुनी आबादी का बोझ सह पाएंगी, सरकार ने नक्शे पास करना शुरू कर दिया।

5. पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं पर दबाव 
याचिकाकर्ताओं और RWA का तर्क है कि यह मामला सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतों का नहीं, बल्कि 'रहने योग्य शहर' (Livable City) का है। चार मंजिल की अनुमति मिलने से सीवरेज ओवरफ्लो, पीने के पानी की किल्लत और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे पुराने निवासियों का जीवन दूभर हो गया है। 

बड़े पैमाने पर हुआ पॉलिसी का उपयोग
पॉलिसी लागू होने के बाद प्रदेश में निर्माण कार्यों में जबरदस्त तेजी देखी गई थी। 
• गुरुग्राम में ही लगभग 8,000 बिल्डिंग प्लान पास किए गए और 1,500 से अधिक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) दिए गए।
• मार्च 2025 तक पूरे हरियाणा में करीब 24,600 भवन योजनाओं को मंजूरी मिल चुकी थी।
• अब तक 11,400 से अधिक इमारतों को OC जारी किया जा चुका है।
अदालत ने कहा कि इतनी भारी संख्या में निर्माण की अनुमति देना यह दर्शाता है कि अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर सुविधाओं की जांच किए बिना ही फाइलें पास कर दीं। 

अदालत की सख्त टिप्पणी 
सुनील सिंह बनाम हरियाणा राज्य मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अफसरों ने केवल खजाना भरने के लिए नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। विशेष रूप से गुरुग्राम जैसे शहर में, जहां पहले से ही बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है, वहां बिना किसी ठोस योजना के 'पहले मंजूरी, फिर योजना' का सिद्धांत अपनाना आत्मघाती है। 
फिलहाल, हाईकोर्ट की इस रोक के बाद उन हजारों लोगों के सामने अनिश्चितता का माहौल है जिन्होंने नक्शे पास करवा लिए थे या निर्माण शुरू कर दिया था। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम और अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। 

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