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मध्यप्रदेश में रेरा ने बिना रजिस्ट्रेशन शहरों से बाहर और ग्रामीण इलाकों में कॉलोनियां विकसित करने वाले 50 से अधिक बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई की है। 20 जिलों में नोटिस जारी कर करीब एक करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई गई है। जानिए क्या हैं नियम, क्यों जरूरी है रेरा रजिस्ट्रेशन और खरीदारों को इससे क्या फायदा होगा।

भोपाल। मध्यप्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) ने बड़ा कदम उठाया है। शहरों की प्लानिंग सीमा से बाहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलोनी विकसित करने वाले 50 से अधिक कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन बिल्डरों ने कॉलोनी तैयार तो कर ली, लेकिन रेरा में पंजीयन नहीं कराया।

नियमों की अनदेखी पर रेरा ने नोटिस जारी कर लगभग एक करोड़ रुपए की कुल पेनाल्टी लगाई है। यह कार्रवाई प्रदेश के 20 जिलों में की गई है। रेरा के नियमों के अनुसार, चाहे परियोजना शहरी क्षेत्र में हो या ग्रामीण इलाके में, कॉलोनी विकसित करने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन कराना जरूी होा है। साथ ही पूरी परियोजना से जुड़ी जानकारी रेरा को उपलब्ध करानी होती है। 

लेकिन कई कॉलोनाइजर बिना पंजीयन के प्लॉट और मकान बेचकर आगे बढ़ जाते हैं, जिससे खरीदारों को बाद में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रेरा को मिली शिकायतों में सामने आया कि कई खरीदारों को समय पर पजेशन नहीं मिला, जबकि उनसे पूरा भुगतान ले लिया गया था। कुछ मामलों में बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी गंभीर शिकायतें आईं।

जब संबंधित बिल्डरों को जवाब देने के लिए बुलाया गया, तो कुछ ने यह दलील दी कि उन्हें प्लानिंग एरिया से बाहर रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता की जानकारी नहीं थी। हालांकि कई कॉलोनाइजरों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए जुर्माना जमा भी कर दिया है।

रेरा अधिकारियों का कहना है कि टीएनसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से लेआउट प्लान की अनुमति लेते समय यह स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए कि रेरा पंजीयन के बाद ही कॉलोनी का विकास किया जा सकेगा। चूंकि रेरा के पास जिलों में निगरानी के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है, इसलिए जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों के सहयोग पर निर्भर रहना पड़ता है।

हाल ही में रायसेन, खरगोन और नरसिंहपुर जिलों में बिना रजिस्ट्रेशन कॉलोनी विकसित करने पर संबंधित कॉलोनाइजरों पर एक से तीन लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई खरीदारों के हितों की सुरक्षा और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
(एपी सिंह की रिपोर्ट)

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