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रतलाम में फर्जी अंकसूची के जरिए अनुकंपा नियुक्ति पाकर लैब असिस्टेंट बने युवक को कोर्ट ने 7 साल की सजा सुनाई है। जांच में दस्तावेज पूरी तरह नकली पाए गए, जिसके बाद अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया।

रतलाम। साल 2014 में एक युवक ने अपने पिता की मौत के बाद नकली शैक्षणिक दस्तावेजों के सहारे अनुकंपा नियुक्ति में सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी। इस मामले में शिकायत के बाद कोर्ट में केस चला। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी सलमान खान (38), निवासी उज्जैन, को दोषी ठहराते हुए 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 2 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि वह जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। 

पिता की मौत के बाद मिली थी नौकरी
घटनाक्रम के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपलौदा में कार्यरत एनएमए अनवर खान का 2014 में निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे सलमान ने अनुकंपा नियुक्ति के तहत नौकरी पाने के लिए आवेदन किया। उसने अपने आवेदन के साथ 10वीं और 12वीं की अंकसूचियां सहित अन्य जरूरी दस्तावेज जमा किए, जिनमें विज्ञान विषय भी दर्शाया गया था। इन दस्तावेजों के आधार पर सलमान को वर्ष 2016 में जिला अस्पताल रतलाम में लेब असिस्टेंट के पद पर अस्थायी नियुक्ति मिल गई। 

जांच में फर्जी पाई गई मार्कशीट
इसके बाद उसने काम शुरू कर दिया। लेकिन कुछ समय बाद उसके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की सत्यता पर संदेह हुआ, जिसके चलते संबंधित विभाग ने भोपाल स्थित मध्यप्रदेश राज्य ओपन स्कूल से उसकी अंकसूची का सत्यापन कराया। जांच में यह सामने आया कि प्रस्तुत की गई अंकसूची रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। वह पूरी तरह फर्जी है। इसके बाद सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा दिए गए दस्तावेज नकली और कूट रचित हैं। सलमान ने जिस अंकसूची का उपयोग किया, वह किसी आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थी।

सजा के साथ अर्थदंड भी लगाया
धोखाधड़ी से हासिल इस नौकरी से आरोपी ने लगभग 97 हजार रुपए से अधिक का वेतन भी प्राप्त किया। पुलिस ने उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया था। इसके बाद न्यायालय ने सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी पाने का दोषी पाया और सात साल की सजा सुनाई। अदालत उस पर अर्थ दंड भी लगाया। अर्थ दंड नहीं चुकाने पर उसे और सजा भुगतनी पड़ेगी।

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