भोपाल। मध्य प्रदेश में आज से इंदौर, भोपाल, उज्जैन और नर्मदापुरम संभागों में गेहूं की सरकारी खरीदी शुरू हो गई है। इस वर्ष खरीदी की शुरुआत सामान्य समय से कुछ देर से हुई है, जिसे लेकर राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर इजराइल-ईरान तनाव का हवाला दिया है। हालांकि विपक्ष ने इस देरी को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया है। राज्यभर में करीब 19.40 लाख किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है, जिससे खरीदी का दायरा काफी बड़ा रहने वाला है।
राजनीतिक रंग: स्वागत भी, विरोध भी
सरकार ने खरीद के पहले दिन को विशेष बनाने के निर्देश दिए हैं। मंत्री, विधायक और सत्ताधारी दल के पदाधिकारी खरीद केंद्रों पर पहुंचकर किसानों का तिलक लगाकर स्वागत किया, इसके बाद खरीद की प्रक्रिया शुरू की गई। इसे सरकार किसान सम्मान के तौर पर प्रस्तुत कर रही है, वहीं विपक्ष इसे दिखावटी कदम बता रहा है। कांग्रेस और उससे जुड़े किसान संगठनों ने आज से प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। कांग्रेस कई जिलों में कलेक्टर कार्यालयों के घेराव करेगी।
व्यवस्थाओं पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को खरीदी प्रक्रिया को सुचारु और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का दावा है कि इस बार बारदाने (बोरी) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके साथ ही उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जिससे शिकायतों का त्वरित समाधान किया जा सके।
किसानों को बेहतर दाम का भरोसा
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि गेहूं के दाम को बेहतर स्तर तक ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए नीतिगत प्रयास जारी हैं। खरीदी केंद्रों पर सूचना प्रसार के लिए पंपलेट और होर्डिंग भी लगाए जा रहे हैं, ताकि किसानों को प्रक्रिया की पूरी जानकारी मिल सके।
15 से अन्य संभागों में शुरू होगी खरीद
चार संभागों में शुरुआत के बाद 15 अप्रैल से शेष संभागों में भी गेहूं खरीदी शुरू कर दी जाएगी। सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत किसानों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। कुल मिलाकर, गेहूं खरीदी की यह शुरुआत प्रशासनिक तैयारियों, राजनीतिक गतिविधियों और किसानों की उम्मीदों के बीच संतुलन बनाने की एक बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।










