भोपाल। प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार पाठ्यपुस्तक निगम की संरचना, अधिकारों और यहां तक कि उसके नाम में भी परिवर्तन करने की तैयारी में है। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निगम की भूमिका को व्यापक बनाया जाए और उसकी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी रूप दिया जाए। यह निर्णय केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि शैक्षणिक सामग्री की खरीदी प्रक्रिया में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव प्रस्तावित है।
खरीद की प्रणाली में होगा बड़ा बदलाव
वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 36,582 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इस बजट के अंतर्गत विद्यालयों के लिए कंप्यूटर, साइकिल, यूनिफॉर्म, फर्नीचर और अन्य आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों की खरीद की जाती है। अभी तक इन सामग्रियों की खरीद राज्य शिक्षा केंद्र और लोक शिक्षण संचालनालय के माध्यम से ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली द्वारा की जाती रही है। प्रस्तावित बदलाव के अनुसार, इन संस्थाओं के प्रत्यक्ष खरीदी अधिकार सीमित किए जाएंगे और यह जिम्मेदारी पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपी जाएगी।
पापुनि को होगा अधिकांश खरीद का अधिकार
नई व्यवस्था के तहत स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ी अधिकांश शैक्षणिक सामग्री की खरीद का दायित्व पाठ्यपुस्तक निगम (पापुनि) को मिलेगा। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की योजना है, जिसमें लोक शिक्षण आयुक्त, राज्य शिक्षा केंद्र के आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। हालांकि अंतिम निर्णय का अधिकार विभागीय मंत्री के पास रहेगा, जिससे नीति-निर्माण में राजनीतिक जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। इस कदम को प्रशासनिक केंद्रीकरण के रूप में देखा जा रहा है, ताकि खरीद प्रक्रिया में समन्वय और पारदर्शिता लाई जा सके।
अगली बैठक में रखा जाएगा यह प्रस्ताव
इन प्रस्तावित परिवर्तनों को पाठ्यपुस्तक निगम की शासक मंडल की आगामी बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक में निगम के अधिनियम को सख्ती से लागू करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा, ताकि भविष्य में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष जैसे पदों की नियुक्ति में अनावश्यक हस्तक्षेप रोका जा सके। सरकार निकट भविष्य में निगमों और मंडलों में नई नियुक्तियां करने की भी तैयारी कर रही है, जिससे संगठनात्मक ढांचे को नया रूप दिया जा सके। वर्तमान नियमों के अनुसार पाठ्यपुस्तक निगम को मुख्य रूप से पुस्तकों की छपाई के लिए कागज की खरीद का अधिकार है।
गुणवत्ता व वित्तीय अनुशासन में होगा सुधार
अब इन नियमों में संशोधन कर शैक्षणिक सामग्री की व्यापक खरीद का अधिकार देने की योजना है। हालांकि अन्य विभागों की सामग्री खरीदने का अधिकार निगम को नहीं दिया जाएगा। निगम को मुख्यतः टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जबकि अंतिम खरीद संबंधी औपचारिकताएं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ही पूरी की जाएंगी। इसके लिए भंडार क्रय नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। यह पहल शिक्षा विभाग की खरीद प्रणाली को एकीकृत और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।









