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गाजा संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने औपचारिक सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में हिस्सा लिया।

Trump Board of Peace: गाजा संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने औपचारिक सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में हिस्सा लिया। फिलहाल भारत इस बोर्ड का स्थायी सदस्य नहीं बना है, लेकिन उसकी भागीदारी ने कूटनीतिक हलकों में कई संकेत दिए हैं।

वाशिंगटन डीसी स्थित United States Institute of Peace में आयोजित इस बैठक में भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक नामग्या खम्पा ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।

दावोस में हुई थी पहल की घोषणा
पिछले महीने World Economic Forum, दावोस में ट्रंप ने गाजा में शांति स्थापना के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की रूपरेखा पेश की थी। उन्होंने दावा किया था कि यह मंच भविष्य में संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को चुनौती दे सकता है।

बैठक में करीब 50 देशों के अधिकारी शामिल हुए। इनमें 27 देश औपचारिक सदस्य हैं, जबकि भारत और यूरोपीय संघ समेत कुछ अन्य देशों ने पर्यवेक्षक के तौर पर भाग लिया।

भारत का रुख क्या है?
भारत को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण मिला है, लेकिन सरकार ने अभी तक इसे स्वीकार करने पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने वाली हर पहल का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री भी गाजा सहित पूरे क्षेत्र में दीर्घकालिक और स्थायी शांति की दिशा में उठाए गए कदमों का स्वागत कर चुके हैं।

हालांकि, पहली बैठक में भारतीय प्रतिनिधि की मौजूदगी से यह संकेत जरूर मिला है कि भारत इस मंच के साथ संवाद बनाए रखना चाहता है, भले ही अभी पूर्ण सदस्यता पर फैसला लंबित हो।

7 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर सहमति
बैठक में ट्रंप ने बताया कि कजाकिस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत समेत नौ देशों ने गाजा के लिए 7 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर सहमति जताई है। साथ ही अमेरिका ने भी शांति बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की है, हालांकि इस राशि के उपयोग को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

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