MP OBC Reservation Case: मध्यप्रदेश। ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। गुरुवार को मामले पर सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने तय किया कि, अप्रैल के आखिरी हफ्ते में केस की सुनवाई होगी। हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सख्त आदेश जारी किए हैं। वकीलों को सुनवाई से पहले पूरी तैयार करने और सब कुछ लिखित रूप में पेश करने के लिए कहा गया है। अदालत में होने वाली यह सुनवाई इस केस निर्णायक हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि, मामले में जल्द फैसला आएगा।
अदालत ने स्पष्ट कहा है कि, ओबीसी आरक्षण मामले में 27, 28 और 29 अप्रैल को सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में केस ट्रांसफर कर तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मुद्दे की स्पष्ट फ्रेमिंग की जाए ऐसे निर्दश अदालत ने दोनों पक्षों को दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को केस हाई कोर्ट को ट्रांसफर किया था। अदालत ने हाई कोर्ट को तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी करें के लिए निर्देशित भी किया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के 87-13 के फॉर्मूले को चुनौती देने वाली याचिका को रिकॉल किया था। इस याचिका पर सुनवाई अप्रैल के दूसरे हफ्ते में होगी।
ओबीसी आरक्षण पर विवाद क्यों
मध्यप्रदेश में पहले ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत था जिसे 13 परसेंट बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया था। यह मामला कानूनी दांव-पेंच में फंसा हुआ है। पहले मामला हाई कोर्ट में था लेकिन सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट लेकर गई। सुप्रीम कोर्ट ने इसे वापस हाई कोर्ट को भेज दिया।
2019 में दिया था 27% आरक्षण
ओबीसी वेलफेयर कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग की थी लेकिन अब मामले पर फैसला हाई कोर्ट द्वारा किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि, यह केस राज्य के कानून और संवैधानिक सीमाओं से जुड़ा है इसलिए अंतिम फैसला हाई कोर्ट को ही लेना चाहिए। साल 2019 में ऑर्डिनेंस के माध्यम से ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किया गया। इसके खिलाफ मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई थी।
एमपी किस वर्ग को कितना मिला आरक्षण
बता दें कि, मध्यप्रदेश में 20 प्रतिशत आरक्षण एसटी वर्ग को मिला है। एससी वर्ग के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत है। इसके अलावा ओबीसी को एमपी में 14 प्रतिशत आरक्षण और EWS वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण मिला था। इस तरह मध्यप्रदेश में कुल आरक्षण 58 प्रतिशत हो गया। सुप्रीम कोर्ट के ही फैसले के अनुसार आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने से कुल आरक्षण 71 प्रतिशत हो गया। इसी कारण मामला अदालत में है और अब हाई कोर्ट इसकी संवैधानिकता तय करेगा।
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