मध्यप्रदेश को जयपुर निवेश कार्यक्रम में 5055 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। सीएम मोहन यादव ने निवेशकों से संवाद कर उद्योगों के लिए बेहतर माहौल का भरोसा दिया।

जयपुर। मध्य प्रदेश में निवेश को लेकर माहौल लगातार मजबूत होता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में जयपुर में आयोजित एक विशेष निवेश कार्यक्रम के दौरान राज्य को करीब 5055 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के जरिए लगभग 3500 से अधिक लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है। यह पहल प्रदेश की आर्थिक प्रगति और औद्योगिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सीएम यादव ने निवेशकों से किया संवाद
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निवेशकों से सीधा संवाद किया और उन्हें मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव सुविधा देने और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, प्रदेश में तेजी से नीतिगत सुधार किए जा रहे हैं, जिससे निवेश प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके।

कई निवेशकों में जताई निवेश की इच्छा
कार्यक्रम में राजस्थान के विभिन्न उद्योग समूहों और व्यापारिक संगठनों से जुड़े 400 से अधिक निवेशकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कई निवेशकों ने मध्यप्रदेश में नए प्रोजेक्ट लगाने में रुचि दिखाई और अपने प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से निवेशकों से चर्चा कर उनकी जरूरतों और सुझावों को समझने का प्रयास किया, ताकि नीतियों को और बेहतर बनाया जा सके।

दोनों राज्यों में रहा है रोटी बेटी का संबंध  
सीएम मोहन यादव ने यह भी बताया कि राज्य सरकार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्पेस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए नई नीतियां तैयार कर रही है। इससे प्रदेश में हाई-टेक इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने मध्यप्रदेश और राजस्थान के आपसी संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों राज्यों के बीच सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव पहले से ही मजबूत रहा है, जिसे रोटी-बेटी का रिश्ता कहा जाता है। 

जल संसाधनों के साझा उपयोग से विकास 
अब जल संसाधनों के साझा उपयोग से यह संबंध और मजबूत हो रहा है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना को उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए अहम बताया, जिससे दोनों राज्यों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच बिजली उपयोग को लेकर एक साझा मॉडल तैयार किया गया है, जिसमें दोनों राज्य बारी-बारी से छह-छह महीने बिजली का उपयोग करेंगे। इससे ऊर्जा संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।