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मध्य प्रदेश में विभागीय जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। अब नोटिस ई-मेल से भेजे जाएंगे और कर्मचारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल हो सकेंगे।

भोपाल। प्रदेश की राजधानी में सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागीय जांच की प्रक्रिया में अनियमितताओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े कई काम इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किए जाएंगे। इस संबंध में विभाग ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

तकनीक अपनाने के लिए नियम बदले
नई व्यवस्था के अनुसार अब विभागीय जांच के दौरान तकनीक का अधिक उपयोग किया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए सिविल सेवा नियमों में भी संशोधन किया है, ताकि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जांच प्रक्रिया को वैधानिक आधार मिल सके। इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके। साथ ही इससे सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भी अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है।

वीसी से आसान हो जाएगी जांच प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत जांच अधिकारी को यह अधिकार दिया गया है कि वह संबंधित सरकारी कर्मचारी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जांच में शामिल होने की अनुमति दे सके। यानी अब जरूरी नहीं होगा कि कर्मचारी हर बार जांच के लिए शारीरिक रूप से उपस्थित हो। इसके अलावा नोटिस और अन्य आवश्यक सूचना ई-मेल के माध्यम से भी भेजी जा सकेगी। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी। 
अब तक विभागीय जांच की अधिकांश प्रक्रिया पारंपरिक यानी मैन्युअल तरीके से होती थी। 

डिजिटल प्रणाली से घटेंगी गड़बड़ियां
पहले कागजी दस्तावेजों के जरिए नोटिस भेजे जाते थे और जवाब भी उसी तरीके से दिए जाते थे। इस वजह से कई बार दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल या देरी जैसी समस्याएं सामने आती थीं। कई मामलों में कर्मचारियों को यह शिकायत भी रहती थी कि नोटिस समय पर नहीं पहुंचा या जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली लागू होने से इन समस्याओं को काफी हद तक कम करने का प्रयास किया जा रहा है। डिजिटल माध्यम से नोटिस भेजने और जवाब प्राप्त करने से पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होगी। 

प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम पहल
साथ ही नोटिस भेजने और जवाब देने की समयसीमा का भी स्पष्ट रिकॉर्ड रहेगा, जिससे विवाद की स्थिति बनने की संभावना कम हो जाएगी। सरकार का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से विभागीय जांच अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सकेगी। इससे कर्मचारियों के साथ होने वाली अनावश्यक परेशानियों को भी रोका जा सकेगा और जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी तरीके से पूरी हो सकेगी। इस नई व्यवस्था को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

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