इंदौर। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जीका) के एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की जिका-II योजना के तहत चल रही बिजली परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दो सदस्यीय दल में मूल्यांकनकर्ता हिसाए ताकाहाशी और जीका के भारत प्रतिनिधि कुणाल गुप्ता शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने परियोजनाओं के निर्माण कार्य, उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन का बारीकी से परीक्षण किया।
पीथमपुर सबस्टेशन और ट्रांसफॉर्मर की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान दल ने पीथमपुर स्थित 400 केवी सबस्टेशन में जिका की सहायता से लगाए गए 315 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफॉर्मर की स्थापना और उसके उपयोग से जुड़े तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी ली। इसके अलावा 132 केवी मंगल्या–दक्षिण जोन इंदौर ट्रांसमिशन लाइन का भी मूल्यांकन किया गया, जिसे राज्य के पहले 132 केवी जीआईएस (गैस इंसुलेटेड स्विचगियर) सबस्टेशन, महालक्ष्मी के लिए लाइन-इन-लाइन-आउट व्यवस्था के तहत विकसित किया गया है।
उद्योगों को मिल रहा स्थिर बिजली सप्लाई का लाभ
एमपी ट्रांसको के अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि इस ट्रांसफॉर्मर की स्थापना से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले जहां औद्योगिक इकाइयों को वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और बाधित आपूर्ति की समस्या का सामना करना पड़ता था, वहीं अब उन्हें निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली मिल रही है। इससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुचारु और लागत-प्रभावी हुई है।
जमीनी हकीकत जानने साइट पर पहुंची टीम
हालांकि मूल्यांकनकर्ता ताकाहाशी ने केवल आधिकारिक जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी हकीकत जानने का निर्णय लिया। उन्होंने स्वयं पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का दौरा किया और वहां की औद्योगिक इकाइयों में पहुंचकर वहां काम रहने वाले लोगों से बातचीत की। इस दौरान जिका प्रतिनिधिमंडल ने उद्योग संचालकों से बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और परियोजना के वास्तविक प्रभाव के बारे में फीडबैक लिया।
एसआरएफ लिमिटेड ने साझा किए अनुभव
पीथमपुर-धार क्षेत्र में चार संयंत्र संचालित करने वाली पैकेजिंग उद्योग की अग्रणी कंपनी एसआरएफ लिमिटेड ने भी अपना अनुभव साझा किया। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि नए पावर ट्रांसफॉर्मर के चालू होने के बाद बिजली आपूर्ति पूरी तरह स्थिर और उच्च गुणवत्ता वाली हो गई है। कंपनी के विधिक प्रमुख ने कहा कि बेहतर बिजली उपलब्धता के कारण अब वे 132 केवी स्तर पर अपना लोड बढ़ाकर लगभग 15 एमवीए करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे दो नई उत्पादन इकाइयों को समर्थन मिलेगा।










