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DAVV के पूर्व कुलपति डॉ. छापरवाल का 15 फरवरी को रतलाम में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे दो बार कुलपति रहे, एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर और आईएमए के अध्यक्ष भी रहे। शिक्षा, चिकित्सा और समाजसेवा में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) के पूर्व कुलपति डॉ. भरत छापरवाल का आज 15 फरवरी सुबह रतलाम में निधन हो गया है। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। परिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्होंने रविवार सुबह अपने घर में अंतिम सांस ली। उनका रतलाम के त्रिवेणी मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया जाएगा। बता दें डॉ. भरत छापरवाल का नाम प्रदेश के शिक्षा जगत में सम्मान के साथ लिया जाता है। वह वर्ष 1996 से 2004 तक लगातार दो कार्यकाल में विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। 

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर रहे
उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय में कई प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधारों की पहल की गई। हालांकि, बाद के सालों में उनके शासन के साथ कुछ मतभेद भी देखने को मिले और इस वजह से अंततः उन्हें पद से भी हटना पड़ा। वे केवल एक प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक कुशल समाजसेवी और चिकित्सक भी थे। बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में उनकी अच्छी ख्याति थी। वह एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर भी कार्यरत रहे। 

लंबे समय तक आईएमए के अध्यक्ष भी रहे
चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है। वह लंबे समय तक आईएमए के अध्यक्ष पद पर भी रहे। इस भूमिका में उन्होंने चिकित्सकों के हितों और स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए लगातार प्रयास किए। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति पद से हटने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई, बल्कि समाजसेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। वह अभ्यास मंडल जैसे बौद्धिक मंच से जुड़े और विभिन्न मुद्दों पर आवाज उठाई।

यूनियन कार्बाइड के कचरे पर उठाई आवाज
औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड कचरे के निपटारे के मुद्दे पर भी उन्होंने लंबा संघर्ष किया और पर्यावरण तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों को प्रमुखता से उठाया। डॉ. छापरवाल का जीवन शिक्षा, चिकित्सा और समाजसेवा के संगम का अनुपम उदाहरण रहा है। उनके निधन से शिक्षा जगत, चिकित्सा समुदाय और सामाजिक संगठनों में शोक व्याप्त है। उन्होंने अपने कार्यों से जो छाप छोड़ी, उसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।  
 

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