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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक युवक अपने ही माता-पिता और भाई की हत्या कर दी। घटना के पीछे मानसिक तनाव की बात सामने आ रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरु कर दी है।

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के सावंगा गांव में 12वीं कक्षा का टॉपर रहा एक युवक दीपक ने अपने ही माता-पिता और भाई की हत्या कर दी। उसने अपने पांच वर्ष के भांजे की भी हत्या करने की कोशिश की, लेकिन सौभाग्य से वह बच गया। जानकारी के अनुसार मृतकों में पिता राजू उर्फ हंसू धुर्वे, मां कमलती धुर्वे और भाई दिलीप धुर्वे शामिल हैं। घटना के बाद आरोपी दीपक घर का दरवाजा बंद कर लाशों के पास बैठा रहा। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो घर के फर्श और दीवारों पर खून के निशान बिखरे हुए थे। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दीहै। 

सामान्य विवाद के बाद दिया घटना को अंजाम
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक परिवार के भीतर किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद आरोपी ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया और तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना इसलिए भी अधिक दुखद है क्योंकि आरोपी युवक कभी एक होनहार छात्र था। उसने 12वीं कक्षा में टॉप किया था और परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन पढ़ाई के बाद उसे मनचाही सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। उसने कई जगह आवेदन दिए, परंतु चयन नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि इस असफलता ने उसके मन पर गहरा प्रभाव डाला। 

चचेरी बहन ने बताया नौकरी नहीं मिलने से था परेशान  
उसकी चचेरी बहन ने बताया कि इसी वजह से वह बीमार रहने लगा। वह मानसिक रूप से बेहद परेशान था। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि पिछले चार-पांच वर्षों से उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। पुलिस अब उसकी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी पृष्ठभूमि की भी जांच कर रही है। इस पूरी घटना का अर्थ केवल इतना नहीं है कि एक युवक ने गुस्से में आकर अपराध कर दिया। यह उस दबाव की कहानी भी हो सकती है, जो आज के युवाओं पर पढ़ाई, नौकरी और भविष्य को लेकर लगातार बढ़ता जा रहा है। 

इस घटना में पूरे समाज के लिए बड़ा सबक 
समाज में सफलता को अक्सर केवल सरकारी नौकरी या आर्थिक स्थिरता से जोड़ा जाता है। जब कोई युवा अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाता, तो वह भीतर से टूट सकता है। यदि समय रहते उसकी मानसिक स्थिति पर ध्यान न दिया जाए, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना कितना आवश्यक है। परिवार और समाज को चाहिए कि वे युवाओं की भावनात्मक स्थिति को समझें, उनसे संवाद करें और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लें। 

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