जबलपुर। बांधवगढ़ नेशनल पार्क से जुड़े एक मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्क में अवैध गतिविधियों और निर्माण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने मामले को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए विस्तृत जवाब मांगा है।
इन अधिकारियों को नोटिस जारी
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया है। इनमें प्रमुख सचिव राजस्व, वन विभाग के सचिव, उमरिया कलेक्टर, सीसीएफ भोपाल, बांधवगढ़ के डायरेक्टर, डीएफओ उमरिया और मानपुर नगर पालिका शामिल हैं। इसके अलावा एक सामाजिक संस्था को भी नोटिस भेजा गया है। अदालत ने सभी से निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
कोर एरिया में गतिविधियों पर सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि जिस क्षेत्र में वन्यजीवों का स्वाभाविक निवास और आवाजाही होती है, वहां नियमों के विपरीत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कोर एरिया में सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन पर्यावरणीय मानकों के खिलाफ है। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर असर पड़ने की आशंका है।
निर्माण कार्यों को लेकर जताई आपत्ति
याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित क्षेत्र में निर्माण कार्यों को शुरु करने की अनुमति दी गई है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियमों की अनदेखी कर गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया और अनेक शिकायतों के बाद भी प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की।
27 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 27 अप्रैल तय की है। अब सभी संबंधित विभागों को अपने पक्ष में जवाब पेश करना होगा। यह मामला पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।