भोपाल। राजधानी स्थित जिला उपभोक्ता आयोग ने एक अहम फैसले में रेलवे को यात्री के पक्ष में मुआवजा देने का आदेश दिया। मामला उस समय सामने आया टिकट कनफर्म नहीं हुआ तो करोंद निवासी सुमित सिंह ने रिफंड लेने का प्रयास किया। रेलवे ने रिफंड देने से इनकार कर दिया, क्योंकि इस दौरान उसका टिकट वालेट के साथ चोरी हो गया था। टिकट नहीं होने के आधार पर रेलवे ने रिफंड देने से इनकार कर दिया। हालांकि, सुमित के पास टिकट होने के दूसरे प्रमाण थे।
वॉलेट चोरी हुआ तो टिकट भी हो गया गुम
इसके बाद सुमित सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। करोंद निवासी सुमित सिंह ने जबलपुर-सोमनाथ एक्सप्रेस का टिकट बुक कराया था, लेकिन सीट कन्फर्म नहीं हो सकी। इसी दौरान उनका वॉलेट चोरी हो गया, जिसमें टिकट भी रखा हुआ था। जब उन्होंने रेलवे से रिफंड के लिए संपर्क किया, तो उनसे मूल टिकट प्रस्तुत करने को कहा गया। टिकट न होने पर रेलवे ने पैसा लौटाने से इंकार कर दिया।
रेलवे के इनकार के बाद आयोग पहुंचा यात्री
रेलवे के इनकार के बाद सुमित सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि टिकट बुकिंग का रिकॉर्ड होने के बावजूद उन्हें रिफंड नहीं दिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि केवल टिकट खो जाने के आधार पर यात्री को रिफंड से वंचित करना गलत है। यात्री के पास बुकिंग का प्रमाण है, तो उसे राशि लौटाना रेलवे की जिम्मेदारी है।
आयोग ने दिया ब्याज समेत पेमेंट का आदेश
फैसले में आयोग ने रेलवे को निर्देश दिया कि वह यात्री को टिकट की राशि के साथ 9 प्रतिशत ब्याज अदा करे। इसके अलावा मानसिक कष्ट के लिए ₹10,000 और वाद व्यय के रूप में ₹5,000 देने को कहा गया। आयोग ने कुल मिलाकर रेलवे को ₹16,524 की राशि दो माह में चुकाने के आदेश दिए। आयोग ने कहा यात्री को केवल तकनीकी आधार पर उसके वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।








