भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में बच्चों में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने के लिए जरूरी सभी तैयारी पूरी कर ली गई हैं। अगले महीने से पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो सकती है। प्रदेश में अब तक पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इससे गंभीर रूप से किडनी समस्या से जूझ रहे बच्चों को बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था। यह सुविधा शहर में उपलब्ध होने से उन्हें परेशान नहीं होना पड़ेगा।
बढ़ रही है बच्चों में किडनी की समस्या
पहले गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे बच्चों को बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था। पिछले कुछ सालों में बच्चों में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। एक अनुमान के अनुसार बीते 10 सालों में ऐसे मामलों में करीब 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा दौर में लगभग 4 से 5 प्रतिशत बच्चे किसी किडनी समस्या से पीड़ित हैं। इनमें से कुछ मामलों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है।
जीवन शैली व खानपान ने बढ़ाई समस्या
डॉक्टरों के अनुसार, बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतें इस समस्या के पीछे बड़ी वजह बन रही हैं। बच्चों में फास्ट फूड, ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ गया है, जिससे किडनी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और आनुवंशिक कारण भी कम उम्र में किडनी रोग का जोखिम बढ़ा देते हैं। कई बार किडनी या मूत्रमार्ग का सही से विकसित न होना, भी इसकी वजह बन जाती है।
ये हैं किडनी में समस्या के सामान्य संकेत
चिकित्सकों के अनुसार बच्चों में किडनी खराब होने के कुछ सामान्य लक्षण सामने आते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सुबह के समय आंखों, चेहरे या पैरों में सूजन आना, पेशाब में बदलाव, झाग आना या रंग बदलना, भूख कम लगना, बार-बार उल्टी होना और शारीरिक विकास में रुकावट जैसे संकेत इशारा करते हैं कि बच्चे में किडनी संबंधी समस्या है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी होता है।
एम्स में बच्चों के लिए शुरू की विशेष यूनिट
एम्स भोपाल में अब बच्चों के लिए विशेष यूनिट तैयार की गई है, जहां किडनी रोगों के इलाज के साथ-साथ डायलिसिस और अन्य उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पिछले एक वर्ष में यहां 100 से अधिक बच्चों का इलाज किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस तरह की सुविधाओं की कितनी आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते बीमारी की पहचान हो जाए, तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।










