भोपाल। पेड़ कटाई और पौधरोपण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। शहर में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के बाद लगाए गए पौधों के जीवित न रहने की शिकायतों के बीच अधिकरण ने नगर निगम से विस्तृत जानकारी मांगी थी। तय समय तक जवाब नहीं मिलने पर अब इस मामले में सख्ती बढ़ा दी गई है। एनजीटी ने नगर निगम को 11 मार्च तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन समय सीमा बीतने के बावजूद यह दस्तावेज जमा नहीं किया गया। इस पर अधिकरण ने नाराजगी जताते हुए नई समयसीमा तय की है।
फोटो-वीडियो सबूत भी देना होगा
अब नगर निगम को 25 मार्च तक हर हाल में हलफनामा पेश करना होगा। इस हलफनामे में पिछले पांच वर्षों के दौरान किए गए पौधरोपण का पूरा ब्यौरा देना अनिवार्य होगा। इसमें पौधों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति और उनके संरक्षण के उपायों की जानकारी देनी होगी। सिर्फ लिखित जानकारी ही नहीं, बल्कि एनजीटी ने साक्ष्य के तौर पर फोटो और वीडियो प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं। इस निर्देश का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जमीनी स्तर पर पौधरोपण की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
समय पर जानकारी नहीं दी तो जुर्माना
अधिकरण ने कहा है कि यदि तय समय में सही जानकारी नहीं दी गई, तो नगर निगम पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। इस पूरे मामले की शुरुआत कोलार क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से हुई थी। आरोप लगाया गया कि हजारों पेड़ों को बिना तय प्रक्रिया का पालन किए काट दिया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह कार्रवाई पर्यावरण से जुड़े नियमों और अदालत के निर्देशों के खिलाफ है। इस पर एनजीटी ने कहा कि जिम्मेदार संस्थाओं को नियमों का पालन करना ही होगा।
पर्यावरण संरक्षण पर सख्त संदेश
अधिकरण ने इस मामले को सार्वजनिक हित से जुड़ा बताते हुए इसे गंभीर लापरवाही माना है। साथ ही संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को लेकर और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकरण ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, यह मामला प्रशासन की जवाबदेही के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की गंभीरता को भी सामने लाता है। अब सभी की नजरें इस बात पर लग गई हैं कि नगर निगम तय समय में पूरी जानकारी देता है या नहीं।









