भोपाल। प्रदेश के नगर निगमों में स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। हर साल होने वाले इस सर्वेक्षण में शहरों की साफ-सफाई के साथ-साथ वायु गुणवत्ता भी एक महत्वपूर्ण मानक है। खासतौर पर वाहनों से निकलने वाला धुआं और उससे होने वाला प्रदूषण इसमें अहम भूमिका निभाता है। इसके बावजूद एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के 16 प्रमुख नगर निगमों में कुल 5,399 सरकारी वाहन ऐसे हैं, जिनमें से अधिकांश बिना फिटनेस, बीमा या पीयूसी प्रमाणपत्र के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
वाहनों के जरूरी दस्तावेज तक नहीं
नगरीय विकास एवं आवास विभाग की रिपोर्ट में बताया गया है कि इन हजारों वाहनों में से 2,356 वाहनों के पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है। इसके अलावा 1,542 वाहनों का बीमा नहीं कराया गया है। जबकि, 1,477 वाहनों का पंजीयन समाप्त हो चुका है। 704 वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) नहीं है। नियमों के मुताबिक ऐसे वाहनों को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं होती, लेकिन इसके बावजूद ये कई शहरों में उपयोग किए जा रहे हैं।
बड़े शहरों में भी स्थिति चिंताजनक
प्रदेश के चार बड़े नगर निगमों के आंकड़े स्थिति को और स्पष्ट करते हैं। इंदौर नगर निगम में सबसे अधिक 1,553 वाहन दर्ज हैं, जिनमें से 917 वाहनों के पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है। भोपाल में 1,462 वाहनों में से 490 की फिटनेस समाप्त हो चुकी है। ग्वालियर में 605 वाहनों में से 410 अनफिट बताए गए हैं। वहीं जबलपुर में भी कई वाहनों के दस्तावेज अधूरे पाए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि कई नगर निगम अपने ही वाहनों के नियमों का पालन कराने में पीछे हैं।
इस बारे मेंअधिकारियों के अलग-अलग बातें
कुछ नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कई वाहनों के दस्तावेज नवीनीकरण की प्रक्रिया में हैं। इंदौर नगर निगम के वर्कशॉप प्रभारी के अनुसार सभी वाहनों के दस्तावेज सही हैं और अनफिट वाहन चलाए नहीं जा रहे। वहीं जबलपुर नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि पुराने वाहनों का उपयोग कम कर दिया गया है और जिनके कागज खत्म हो चुके हैं, उन्हें जल्द अपडेट कराया जा रहा है।
नियम तोड़ने पर सख्त सजा
मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना बीमा, फिटनेस या पीयूसी के वाहन चलाना दंडनीय अपराध है। पहली बार बिना बीमा वाहन पकड़े जाने पर 2,000 रुपए तक का जुर्माना या तीन महीने तक की सजा हो सकती है। दोबारा गलती होने की स्थिति में यह जुर्माना बढ़ाकर 4,000 रुपए कर दिया जाता है और 3 माह जेल की सजा का प्रावधान है। इसी तरह वैध फिटनेस प्रमाण पत्र के बिना वाहन चलाने पर पहली बार 2,000 और बाद में 10,000 रुपए तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
प्रदूषण में वाहनों की बड़ी भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े शहरों में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहन हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में कुल प्रदूषण का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा वाहनों से निकलने वाले धुएं से जुड़ा होता है। ऐसे में नगर निगमों के वाहनों का नियमों के बिना चलना पर्यावरण और नागरिकों की सेहत दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यह एक गंभीर समस्या है, लेकिन दुख की बात यह है कि इसके बाद भी इसको गंभीरता से नहीं लिया जाता है।