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हरियाणा के पंचकूला में बेशकीमती सरप्लस जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवाने वालों पर अब कानूनी शिकंजा कस सकता है। सरकार भू-माफियांओं के साथ वर्तमान व पूर्व आईएएस अफसरों व रसूखदार लोगों पर कार्रवाई को मंथन कर रही है। रजिस्ट्री पर पहले ही रोक लगा चुकी है। इसमें एक आईएएस दंपत्ति का नाम भी सामने आया था।

Panchkula Surplus land News, योगेंद्र शर्मा। पंचकूला में बेश कीमती सरप्लस जमीन के नाम पर खेल करने और अधिकारियों पर दबाव बनाकर उसकी रजिस्ट्री कराने का मामला कुछ लोगों के गले की फांस बन सकता है। पूरे मामले में शामिल पूर्व आईएएस और वर्तमान अफसरों व उनके परिजनों के विरुद्ध  केस तक दर्ज हो सकता है। इस बारे में एक लिखित शिकायत भी पंचूकला के पुलिस अफसरों को दी गई है।

सीएम, मुख्य सचिव व विजिलेंस का शिकायत

पंचकूला की बेशकीमती जमीन के नाम पर योजना बनाकर खेल करने वालों के विरुद्ध एक लिखित शिकायत अंबाला के रहने वाले शिकायतकर्ता ने देते हुए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव हरियाणा सरकार, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व, डीजीपी के साथ साथ में एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रमुख को भी शिकायत भेजी गई है। खास बात यह है कि पूरे मामले में मंडल पर तैनात एक महिला अफसर, उनके पति जो बतौर सूचना आय़ुक्त तैनात किए गए हैं। इतना ही नहीं उनके बेटे पर भी कार्रवाई की मांग की गई है। आरोप है कि पद का दुरुपयोग करते हुए इन रसूखदार लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर कदम उठाए गए।

दशकों से अटका इंतकाल होते ही किया था सौदा

राज्य सरकार और मुख्य सचिव के पास मामला जाने के बाद में रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई थी। बेशकीमती जमीन को लेकर गोलमाल की शुरुआत जमीन की खरीद से हुई। भरोसेमंद उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि पृथ्वीराज सहित कई लोगों ने जमीन की खरीद की थी। इसमें पूर्व आईएएस अधिकारी गुलाटी और उनके पति शामिल थे। पूर्व आईएएस. दंपति ने दो दशक पहले उक्त जमीन की रजिस्ट्री करा ली, लेकिन उसका इंतकाल नहीं हो पाया था। जमीन के इंतकाल को लेकर लंबे समय से कवायद चल रही थी। 

तहसीलदार व नायब तहसीलदार पर बनाया था दबाव 

सूत्रों का कहना है कि पृथ्वीराज सहित अन्य की अपील पर गत वर्ष अंबाला मंडल आयुक्त की कोर्ट ने इंतकाल करने के आदेश दिए। इंतकाल दर्ज होने के बाद फिर उक्त लोगों ने जमीन बेचने की योजना बनाई। इसमें पंचकूला सेक्टर 6 निवासी सतबीर सिंह से उनका बयाना हो गया और रजिस्ट्री का समय निर्धारित हो गया। सूत्र बताते हैं कि रजिस्ट्री से पहले पंचकूला के तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने रजिस्ट्री करने से मामले की गंभीरता को देखते हुए इनकार कर दिया, पंचकूला में तैनात इन अफसरों पर काफी दबाव बनाया गया और खरी खोटी भी सुनाई गई।

रजिस्ट्री पर रोक से सपनों पर फिरा पानी

तहसीलदार ने जानकारी उपायुक्त सुशील सारवान को दी गई। डीसी पंचूकला ने मामले में एफसीआर को पत्र लिखकर रजिस्ट्री को लेकर दिशा-निर्देश मांगा, जिसमें 29 मार्च को एफसीआर. ने रजिस्ट्री नहीं करने का सख्त निर्देश जारी किया। अफसरों ने मंडल आयुक्त कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि जब जमीन सरप्लस यानी सरकारी खाते में है, तो उस जमीन का मालिक निजी व्यक्ति कैसे हो सकता है? कुल मिलाकर रसूखदार लोगों के इरादों पर पानी फिर गया है फिलहाल सरकार ने इसकी रजिस्ट्री करने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।
 

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