हरियाणा राज्य महिला आयोग ने इस गाने में मौजूद दृश्यों और बोलों को 'अश्लील' और 'मर्यादाहीन' बताते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को पत्र लिखकर जवाब तलब किया है।
चेयरपर्सन रेनू भाटिया का कड़ा प्रहार
हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने स्पष्ट किया है कि इस गाने में दिखाए गए दृश्य और इशारे सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन हैं। आयोग का मानना है कि गानों में बढ़ता अश्लीलता का यह चलन न केवल सांस्कृतिक मूल्यों को ठेस पहुँचा रहा है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी प्रसारित कर रहा है।
सेंसर बोर्ड से पूछे तीखे सवाल
महिला आयोग ने अपने पत्र में CBFC से सीधे सवाल किए हैं।किस आधार पर इस तरह के आपत्तिजनक कंटेंट को सार्वजनिक प्रसारण की अनुमति दी गई?क्या प्रमाणन के दौरान निर्धारित मानकों और सामाजिक मर्यादाओं का पालन किया गया था? बच्चों और युवाओं की सोच पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव की जिम्मेदारी कौन लेगा?
"गंभीर सामाजिक चिंता का विषय"
आयोग ने चेतावनी दी है कि मीडिया और संगीत समाज की सोच को आकार देते हैं। “सरके चुनर तेरी सरके” जैसे गाने युवाओं और बच्चों के व्यवहार पर दीर्घकालिक नकारात्मक असर डाल सकते हैं, जिससे नैतिक गिरावट की आशंका है। आयोग ने इसे 'गंभीर सामाजिक चिंता' करार देते हुए भविष्य में ऐसे कंटेंट की कड़ी जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस
इस विवाद के सामने आने के बाद इंटरनेट दो गुटों में बंट गया है। जहां एक बड़ा वर्ग महिला आयोग के इस कदम का समर्थन करते हुए इसे भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' में हस्तक्षेप मान रहा है।
आगे की कार्रवाई की चेतावनी
महिला आयोग ने संकेत दिया है कि यदि CBFC की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला या अश्लील कंटेंट के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आयोग इस दिशा में और भी सख्त कानूनी कदम उठाने पर विचार कर सकता है।
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