हाईकोर्ट ने कचरा निस्तारण में बरती गई लापरवाही पर कड़ा रूख अपनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जेब से जुर्माना वसूला जाएगा।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में कचरा निस्तारण में बरती गई लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए 40 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। अदालत ने साफ कर दिया है कि यह जुर्माना सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जेब से वसूला जाएगा।

कचरा हटाने के बजाय मिट्टी से दबाया, तस्वीरों ने खोली पोल
यह पूरा मामला मनीमाजरा क्षेत्र से जुड़ा है। वकील गीतिका शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह खुलासा हुआ कि नगर निगम ने इलाके से कचरा साफ करने के बजाय उसे वहीं फैलाकर ऊपर से मिट्टी और मलबे से ढक दिया था।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने जब प्रशासन द्वारा पेश की गई तस्वीरों की जांच की, तो पाया कि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के बजाय उसे केवल छिपाने की कोशिश की गई थी।

हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी: "क्या अब कोर्ट ही निगम का काम करेगी?"
सुनवाई के दौरान अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "क्या अब नगर निगम का नियमित काम भी कोर्ट को ही करना पड़ेगा? यह प्रशासन का बुनियादी कर्तव्य है, लेकिन इसके लिए अदालत का बहुमूल्य समय बर्बाद किया गया। अदालत ने निगम से यह भी सवाल किया कि यदि वहां नियमित कंपोस्टिंग का दावा किया जा रहा है, तो कंपोस्ट पिट (गड्ढे) कहां हैं? मौके पर न तो कोई फेंसिंग मिली और न ही कचरा प्रबंधन का कोई ठोस ढांचा।

15 दिन के भीतर जमा करानी होगी राशि
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:

  • जुर्माने की राशि: 40 हजार रुपये अगले 15 दिनों के भीतर जमा कराने होंगे।
  • वसूली: यह राशि नगर निगम के उन अधिकारियों से वसूली जाए जो इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं।
  • दोबारा अपील की छूट: याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी है कि यदि भविष्य में दोबारा वहां कचरा जमा होता है, तो वे फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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