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हरियाणा में स्मार्ट सिटी फंड गबन की जांच अब उच्चाधिकारियों तक पहुँच गई है।जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता ही जांच के घेरे में आ सकते है जिसकी गहन जांच अभी चल रही है।

सिटी ब्यूटीफुल में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन से लेकर नगर निगम तक की नींव हिला दी है। ₹75 करोड़ के CREST घोटाले और ₹116.84 करोड़ के स्मार्ट सिटी फंड गबन की जांच अब सीधे तौर पर उच्चाधिकारियों तक पहुँच गई है। आर्थिक अपराध शाखा की पूछताछ में कई सफेदपोशों के नाम सामने आने से हड़कंप मच गया है।

प्रमुख खुलासे: शिकायतकर्ता ही जांच के घेरे में?
मामले में तब नया मोड़ आया जब मुख्य आरोपी विक्रम वधावा और बैंक मैनेजरों ने पूछताछ में CREST के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह का नाम लिया। गौर करने वाली बात यह है कि सुखविंदर सिंह ही इस मामले में मुख्य शिकायतकर्ता हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी उन्हें आधिकारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया है, लेकिन उनकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

घोटाले का 'मोडस ऑपेरंडी'
जांच में पता चला है कि आरोपियों ने सरकारी पैसे को हड़पने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया:

  • फर्जी एफडी का जाल: नियमों के खिलाफ जाकर एक बड़ी राशि की 11 अलग-अलग एफडी बनाई गईं, जबकि रिकॉर्ड में केवल एक ही दिखाई गई।
  • 272 संदिग्ध एंट्रियां: बैंक खातों की जांच में 272 ऐसी ट्रांजैक्शन मिली हैं जो अनाधिकृत थीं। इनमें से 31 लेनदेन पूरी तरह से फर्जी पाए गए हैं।
  • शेल कंपनियों में ट्रांसफर: करोड़ों रुपए रिश्तेदारों के खातों और 'कैपको फिनटेक' व 'मर्टल बिल्डवेल' जैसी शेल कंपनियों में भेजे गए।
  • जाली बैंक स्टेटमेंट: अधिकारियों को गुमराह करने के लिए ईमेल के जरिए छेड़छाड़ किए गए फर्जी बैंक स्टेटमेंट भेजे जाते रहे।

600 पन्नों की रिपोर्ट और अफसरों में खौफ
नगर निगम ने स्मार्ट सिटी फंड घोटाले से जुड़ी 600 से अधिक पन्नों की आंतरिक जांच रिपोर्ट EOW को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में कई प्रशासनिक अधिकारियों की वित्तीय भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जल्द ही कुछ बड़े नामों को एफआईआर में शामिल किया जा सकता है।

विपक्ष ने की कॉल डिटेल खंगालने की मांग
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लकी ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर का घोटाला बिना किसी बड़े अधिकारी के संरक्षण के संभव नहीं है। उन्होंने मांग की है कि आरोपियों के पिछले एक साल की कॉल डिटेल और व्हाट्सएप चैट सार्वजनिक की जाए ताकि असली मास्टरमाइंड बेनकाब हो सकें।

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