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बीजापुर के मुनगा गांव में आंगनबाड़ी भवन के अभाव में पिछले कई वर्षों से आम के पेड़ के नीचे संचालित हो रही है, जहां 40 बच्चों के लिए न मूलभूत सुविधाएं हैं न सुरक्षा।

गणेश मिश्रा - बीजापुर। बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर मुनगा गांव में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति बेहद चिंताजनक है। पिछले कई वर्षों से यहां उचित भवन न होने के कारण खुले आसमान के नीचे, आम के एक पेड़ के तले बच्चों की शिक्षा और पोषण गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। यह तस्वीर महिला एवं बाल विकास विभाग की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

झोपड़ी से पेड़ के नीचे तक सफर
आंगनबाड़ी संचालिका के अनुसार, 1999 में यहां झोपड़ी में आंगनबाड़ी की शुरुआत हुई थी, लेकिन सलवा जुडूम काल के बाद झोपड़ी भी नष्ट हो गई, जिसके बाद से लगभग 7-8 वर्षों से आम के पेड़ के नीचे ही आंगनबाड़ी चल रही है। यहां न तो पठन-पाठन सामग्री उपलब्ध है, न बच्चों के लिए पर्याप्त जगह, न बैठने की उचित सुविधा। करीब 40 बच्चों के लिए सिर्फ एक छोटी सी दरी का इंतजाम है।

मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव
मुनगा आंगनबाड़ी में न शेड है, न सुरक्षा, न पीने के पानी की व्यवस्था, और न ही बच्चों के लिए पढ़ाई का कोई बुनियादी साधन। जिसके कारण बारिश हो, तेज धूप हो या ठंड- बच्चों की कक्षाएं इसी पेड़ के नीचे चलती हैं। यह व्यवस्था नौनिहालों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए जोखिमपूर्ण है।

विकास के दावों की पोल खोलती तस्वीर
एक ओर सरकार बस्तर में उन्नति, सड़क, बिजली और नक्सल-मुक्त क्षेत्र का दावा करती है, लेकिन दूसरी ओर मुनगा गांव में बच्चों को पेड़ के नीचे पढ़ने की मजबूरी इन दावों पर बड़ा सवाल है। अगर विभाग और प्रशासन ने समय रहते ध्यान दिया होता, तो शायद 25 साल बाद भी बच्चे ऐसी परिस्थितियों में न पढ़ रहे होते।

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