जोड़-तोड़ से बचने के लिए कांग्रेस के बाद अब भाजपा ने भी अपने विधायकों की घेराबंदी तेज कर दी है। भाजपा ने अपनी रणनीति बदलकर चंडीगढ़ के एक फाइव स्टार होटल में विधायकों को चुनावी ट्रेनिंग दे रही है।

हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर मची हलचल अब 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' में तब्दील हो गई है। प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, दोनों ही अपने कुनबे को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। जहां कांग्रेस ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के होटलों में शरण ली है, वहीं भाजपा ने भी अंतिम समय में अपनी रणनीति बदलते हुए विधायकों को चंडीगढ़ के लग्जरी होटल में शिफ्ट कर दिया है।

हिमाचल में दीपेंद्र हुड्डा की निगरानी
कांग्रेस ने किसी भी प्रकार की सेंधमारी (क्रॉस वोटिंग) से बचने के लिए अपने 37 में से 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी स्थित 'होटल ट्विन टावर' भेज दिया है। इन विधायकों की सुरक्षा और निगरानी का जिम्मा खुद हिमाचल पुलिस के पास है। जैसे ही विधायकों का काफिला चंडीगढ़ से हिमाचल की सीमा में दाखिल हुआ, पुलिस ने उन्हें एस्कॉर्ट करना शुरू कर दिया।

इस 'विधायक बचाओ' मिशन की कमान रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा संभाल रहे हैं। पार्टी ने कुल चार सांसदों को विधायकों के साथ रहने की जिम्मेदारी दी है, जिनमें हिसार से जयप्रकाश (जेपी), अंबाला से वरुण चौधरी और सोनीपत से सतपाल ब्रह्मचारी शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि वरुण चौधरी की पत्नी पूजा चौधरी, जेपी के बेटे विकास सहारण और रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला खुद विधायक हैं और इस घेराबंदी का हिस्सा हैं।

बीजेपी की रणनीति : ट्रेनिंग के बहाने होटल में डेरा 
अब तक कांग्रेस की रणनीति को देख रही भाजपा ने भी अंतिम क्षणों में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। भाजपा ने चंडीगढ़ के एक फाइव स्टार होटल को बुक किया है, जहां सभी विधायकों और मंत्रियों के रहने का इंतजाम किया गया है। हालांकि, पार्टी इसे 'होटल पॉलिटिक्स' के बजाय 'इलेक्शन ट्रेनिंग' का नाम दे रही है। भाजपा का कहना है कि विधायकों को वोटिंग की बारीकियों को समझाने के लिए यहां रखा गया है। 16 मार्च को होने वाली वोटिंग के दिन ये सभी विधायक होटल से सीधे विधानसभा पहुंचेंगे। 

पार्टी ने इस चुनाव के लिए ऑब्जर्वर और एजेंट भी नियुक्त कर दिए हैं। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी को चुनाव एजेंट बनाया गया है, जबकि खेल मंत्री गौरव गौतम और विधायक सुनील सांगवान को पार्टी प्रतिनिधि की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

निर्दलीय विधायक एक अहम कड़ी बनकर उभरे 
इस चुनावी शतरंज में निर्दलीय विधायक एक अहम कड़ी बनकर उभरे हैं। एक निर्दलीय विधायक ने बड़ा दावा कर कहा है कि कांग्रेस के कम से कम 10 विधायक उनके संपर्क में हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इनमें से कई विधायक बिजनेसमैन बैकग्राउंड से हैं। वहीं, कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सांसद कुमारी सैलजा अब तक इस पूरी प्रक्रिया से दूर नजर आ रही हैं। वे पार्टी उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध के नामांकन में भी शामिल नहीं हुई थीं, हालांकि बौद्ध ने दिल्ली जाकर उनसे मुलाकात जरूर की थी। कांग्रेस के जो 6 विधायक शिमला नहीं गए, उन्होंने निजी कारणों का हवाला दिया है, लेकिन पार्टी हाईकमान की नजरें उन पर टिकी हैं। 

हुड्डा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल 
राज्यसभा चुनाव में दीपेंद्र हुड्डा के फ्रंट फुट पर आने के पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं। पहला- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का विधायकों पर मजबूत प्रभाव है। दीपेंद्र की सक्रियता यह सुनिश्चित करने के लिए है कि संगठन एकजुट रहे और हाईकमान का भरोसा बना रहे। दूसरा साल 2016 और 2022 में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग के कारण राज्यसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। और तीसरा
चूंकि उम्मीदवार राहुल गांधी की पसंद का है, इसलिए हार की स्थिति में सीधे तौर पर राज्य नेतृत्व (हुड्डा कैंप) पर गाज गिर सकती है।

वोटिंग की रिहर्सल और हाईकमान की नजर 
कांग्रेस हाईकमान इस चुनाव की पल पल की मॉनिटरिंग कर रहा है। विधायकों को न केवल एकजुट रखने की कोशिश हो रही है, बल्कि उन्हें वोट डालने की रिहर्सल भी करवाई जा रही है ताकि 'कैंसिल वोट' जैसी तकनीकी गलतियों से बचा जा सके। पर्यवेक्षक के रूप में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और बीके हरिप्रसाद खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। चूंकि राज्यसभा में 'ओपन वोटिंग' होती है, इसलिए विधायकों को अपना वोट इन नेताओं को दिखाना होगा ताकि क्रॉस वोटिंग की गुंजाइश खत्म हो जाए।

बीजेपी का प्लान बी और हर्ष सांघवी का रोल 
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि गुजरात के नेता हर्ष सांघवी परदे के पीछे से रणनीति तैयार कर रहे हैं। उनका ध्यान उन विधायकों पर है जो अपनी पार्टी से असंतुष्ट हैं। निर्दलीय और सहयोगी विधायकों के जरिए विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिशें जारी हैं। यही कारण है कि हरियाणा की राजनीति फिलहाल चंडीगढ़ के फाइव स्टार होटलों और शिमला की वादियों के बीच सिमट गई है।