हरियाणा के हिसार के निजी नर्सिंग कॉलेज के चेयरमैन जगदीश गोस्वामी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। करीब 90 दिनों तक जेल में रहने के बाद गोस्वामी की रिहाई का रास्ता साफ हुआ। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के बाद उन 8 छात्राओं के बयान सार्वजनिक हो गए हैं, जिन्होंने चेयरमैन पर यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। यह मामला पिछले कई महीनों से हरियाणा की राजनीति और सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बाथरूम में प्रताड़ना और अश्लील हरकतें करने का आरोप
पीड़ित छात्राओं ने चेयरमैन की कार्यप्रणाली और उनके चरित्र पर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। एक छात्रा ने बताया कि जगदीश गोस्वामी उसे बहाने से बुलाकर बाथरूम में ले गया और वहां उसे फंसाकर शारीरिक उत्पीड़न की कोशिश की। आरोप है कि उसने छात्रा की टी-शर्ट उतारने का प्रयास किया। छात्रा ने यह भी बताया कि चेयरमैन उसे अक्सर बिना वजह थप्पड़ मारता, बाल खींचता और अवांछित तरीके से स्पर्श करता था।
एक अन्य घटना का जिक्र कर छात्रा ने बताया कि चेयरमैन हॉस्टल के कमरे में घुस आया और उसे जबरन अपने पैर दबाने के लिए मजबूर किया। खान-पान को लेकर भी चेयरमैन का व्यवहार बेहद अपमानजनक था, मेस में भूख लगने पर छात्रा को जानबूझकर बासी रोटी दी गई और उसे ही खाने के लिए विवश किया गया।
सोते समय धमकियां दीं
दूसरी छात्रा ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि 20 अप्रैल 2025 की रात जब वह अपने कमरे में सो रही थी, तब चेयरमैन वहां अनधिकृत रूप से दाखिल हुआ। आरोप है कि उसने सोती हुई छात्रा की कमर से चादर हटा दी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर कहा कि उसने उसके शरीर को छू लिया है। उस वक्त छात्रा ने शॉर्ट्स पहनी हुई थी, जिससे वह असुरक्षित और बेहद डरी हुई महसूस करने लगी।
सिर पर सेब रखकर तीर चलाया
छात्राओं के आरोपों में सबसे चौंकाने वाला खुलासा 'टारगेट प्रैक्टिस' को लेकर हुआ है। तीसरी छात्रा ने बताया कि जब उसने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की, तो चेयरमैन ने उसे व्यक्तिगत रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। एक दिन चेयरमैन ने उसे अपने घर बुलाया और उसके सिर पर एक सेब रख दिया। उसने छात्रा को लक्ष्य अभ्यास के लिए खड़े होने को कहा। जब छात्रा और उसकी सहेली ने मना किया, तो चेयरमैन ने पीछे से तीर चला दिया, जो लगभग उन्हें लग ही गया था।
छात्राओं का कहना है कि चेयरमैन अक्सर उन पर तीर चलाकर डराने का काम करता था। इसके अलावा, बीमार होने पर भी छात्राओं को अस्पताल नहीं ले जाया जाता था। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि पैर में फ्रैक्चर होने और मेडिकल रिपोर्ट होने के बावजूद उसे इलाज के लिए बाहर नहीं जाने दिया गया और उसके परिवार को उसकी स्थिति के बारे में गुमराह किया गया।
मानसिक उत्पीड़न और करियर बर्बाद करने का डर
छात्राओं ने बताया कि चेयरमैन अक्सर रात 10 बजे के बाद बिना वार्डन के लड़कियों के कमरों में घुस जाता था। जब छात्राओं ने अपने परिजनों को यह बात बताई, तो उन्हें प्रताड़ित करने के लिए उनके कमरे बदल दिए गए। चेयरमैन बार-बार यह धमकी देता था कि यह उसका कॉलेज है और वह उनकी डिग्री रुकवा सकता है या करियर बर्बाद कर सकता है। एक छात्रा के भाई को, जो उसे लेने आया था, स्टाफ ने 'गुंडा' और 'बॉयफ्रेंड' कहकर अपमानित किया, जबकि उसकी फोटो आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज थी।
पालतू जानवरों से डराया
एक अन्य पीड़िता ने बताया कि चेयरमैन ने नई कार खरीदने की खुशी में उसे मिठाई बांटने के लिए बुलाया, लेकिन वहां उसके चेहरे पर गंदा पानी फेंक दिया। जब छात्रा ने विरोध किया, तो वहां मौजूद स्टाफ ने इसे महज एक 'मजाक' करार दिया। सातवीं छात्रा ने आरोप लगाया कि चेयरमैन उसे अपने निजी कमरे में शिफ्ट होने का दबाव बनाता था और मना करने पर अपनी पालतू बिल्ली से उसे डराता था। विरोध करने पर उसे पीठ और सिर पर थप्पड़ मारे जाते थे।
छात्राओं ने कड़ाके की ठंड में कॉलेज के बाहर धरना दिया था
दिसंबर 2025 में जब यह मामला पहली बार सामने आया, तो छात्राओं ने कड़ाके की ठंड में कॉलेज के बाहर धरना दिया था। पुलिस ने शुरुआत में ढिलाई बरती, लेकिन भारी दबाव के बाद चेयरमैन, उसकी पत्नी और बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया। इस आंदोलन को खाप पंचायतों और किसान संगठनों का भी भरपूर समर्थन मिला था।
ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा
हाल ही में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चेयरमैन के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और कई छात्राओं ने अब एफिडेविट देकर इसे 'गलतफहमी' बताया है। कोर्ट ने माना कि ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा, इसलिए आरोपी को जमानत दी जा सकती है। हालांकि, हरियाणा महिला आयोग की जांच में कॉलेज के हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां (जैसे कमरों में कुंडी न होना) और शैक्षणिक स्टाफ की कमी पाई गई थी। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक टीमें छात्राओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए उनके दूसरे कॉलेजों में स्थानांतरण (Migration) की प्रक्रिया पर काम कर रही हैं।









