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राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस के भीतर मची रार अब खुलकर सामने आ गई है। 

सोमवार को दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में बुलाई गई कांग्रेस विधायक दल की बैठक ने कई बड़े संकेत दिए हैं। इस बैठक से न केवल क्रॉस वोटिंग करने वाले 5 विधायकों को दूर रखा गया, बल्कि स्टार विधायक विनेश फोगाट की अनुपस्थिति ने भी चर्चाओं को हवा दे दी है।

 

बैठक में 30 विधायक मौजूद, 5 को न्योता नहीं
राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन से भटकने वाले विधायकों को कड़ा संदेश देते हुए अनुशासन कमेटी ने उन्हें बैठक का न्योता ही नहीं दिया।बैठक में नवनिर्वाचित सांसद कर्मवीर बौद्ध सहित 30 विधायक शामिल हुए।जुलाना से विधायक विनेश फोगाट और पूजा चौधरी भी बैठक में नहीं पहुँचीं, जिसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

दो गुटों में बंटी कांग्रेस
बैठक शुरू होने से पहले ही विधायक दो धड़ों में बंटे नजर आए। एक खेमा उन 5 विधायकों के खिलाफ तुरंत निष्कासन की कार्रवाई चाहता है जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की। दूसरा खेमा उन 4 विधायकों के नाम भी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है जिनके वोट 'इनवैलिड' (रद्द) घोषित हुए। उनका मानना है कि गलती सिर्फ क्रॉस वोटिंग करने वालों की नहीं, बल्कि वोट रद्द कराने वालों की भी है।

3 ने दिया जवाब, 2 विधायकों ने दिखाए बगावती तेवर
अनुशासन कमेटी के 'कारण बताओ' नोटिस पर विधायकों का रुख इस प्रकार रहा। शैली चौधरी (नारायणगढ़), रेनू बाला (साढ़ौरा) और जरनैल सिंह (रतिया) ने जवाब में कहा है कि उन्होंने पार्टी को ही वोट दिया था, लेकिन कमेटी उनके जवाब से संतुष्ट नहीं है।पुन्हाना विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन विधायक मोहम्मद इसराइल ने नोटिस का जवाब न देकर साफ कर दिया है कि वे अब पार्टी की बंदिशों को मानने के मूड में नहीं हैं।

इस्तीफे की चर्चा और उपचुनाव की आहट
सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि शैली चौधरी और मोहम्मद इलियास अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। माना जा रहा है कि ये विधायक अपने परिवार के सदस्यों या करीबियों को चुनावी मैदान में उतारने के लिए सीटें छोड़ सकते हैं। यदि इन सीटों पर उपचुनाव होते हैं, तो बीजेपी खासकर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों (मेवात बेल्ट) में सेंध लगाने का बड़ा दांव खेल सकती है।

हाईकमान के पाले में गेंद
अनुशासन कमेटी ने 28 मार्च को ही अपनी रिपोर्ट दिल्ली हाईकमान को सौंप दी है। रिपोर्ट में जवाब न देने वाले विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। यदि इन 5 विधायकों को पार्टी से निकाला जाता है, तो उन पर 'दल-बदल कानून' के तहत विधानसभा सदस्यता खोने का खतरा भी मंडरा सकता है।

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