हरियाणा के कृषि क्षेत्र में एक बार फिर सरकार और अन्नदाता आमने-सामने हैं। प्रदेश की अनाज मंडियों में लागू किए गए बायोमेट्रिक सत्यापन और नए नियमों के विरोध में सोमवार को करनाल में किसानों का जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में एकजुट हुए किसानों ने नई अनाज मंडी स्थित मार्केट कमेटी कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया और वहीं बैठकर धरना शुरू कर दिया। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के कारण मंडी का कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा।
जटिल प्रक्रिया का विरोध
धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से फसल खरीद के लिए लागू की गई नई व्यवस्था, विशेषकर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, उनके लिए जी का जंजाल बन गई है। किसानों के अनुसार इन नई तकनीकी जटिलताओं के कारण उन्हें अपनी उपज बेचने में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और कई बार सिस्टम की खराबी की वजह से फसल की तुलाई तक नहीं हो पाती। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि सरकार इन नए प्रयोगों को तुरंत बंद करे और पुरानी सरल व्यवस्था के तहत ही अनाज की खरीद सुनिश्चित करे।
11 अप्रैल के चक्का जाम के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया
भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख नेता सुरेंद्र सांगवान ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह विरोध कोई अचानक शुरू हुई घटना नहीं है। इससे पहले भी किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन को कई बार चेतावनी दी थी। बीते 11 अप्रैल को भी संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर प्रदेश भर में सड़कों को जाम किया गया था। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके परिणामस्वरूप किसानों को आज मंडी के गेट बंद करने जैसा कड़ा फैसला लेना पड़ा।
किसान विरोधी हैं ये तीन नए नियम
किसान नेता सुरेंद्र सांगवान ने आरोप लगाया कि इस सीजन में सरकार जो तीन नए नियम मंडियों में लेकर आई है, वे पूरी तरह से किसान विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी पहले ही घाटे का सौदा साबित हो रही है और ऊपर से सरकार प्रक्रियाओं को और कठिन बनाकर किसानों की कमर तोड़ रही है। किसानों पर सख्ती की बजाय सरकार को उनकी व्यावहारिक समस्याओं को समझना चाहिए और उन्हें राहत देनी चाहिए।
पुरानी व्यवस्था बहाली की मांग
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि पहले की व्यवस्था काफी सुचारू थी और किसान बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी फसल बेचकर घर लौट जाते थे, लेकिन इस बार गेहूं की आवक के साथ ही परेशानियों का अंबार लग गया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया और पुराने नियमों को बहाल नहीं किया तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।
तल्ख हैं किसानों के तेवर
करनाल के साथ-साथ निसिंग और प्रदेश की अन्य मंडियों में भी इसी तरह के विरोध की खबरें आई हैं। फिलहाल, किसानों के तेवर तल्ख हैं और वे किसी भी कीमत पर नए नियमों को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार तकनीकी पारदर्शिता के अपने दावों पर अड़ी रहती है या किसानों की सहूलियत के लिए नियमों में ढील देती है।
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