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रामकिशन गुर्जर की पत्नी और नारायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी के भी जल्द ही कांग्रेस को अलविदा कहने की प्रबल संभावनाएं हैं। शैली उन 5 विधायकों में शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था।

हरियाणा की सियासत में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद शुरू हुआ भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस पार्टी, जो अपनी सीट बचाने में बमुश्किल कामयाब रही, अब अंदरूनी कलह और बगावत की आग में झुलस रही है। ताजा घटनाक्रम में हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने अपने पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे के बाद अब सबकी नजरें उनकी पत्नी और नारायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी पर टिकी हैं, जिनके भी जल्द ही कांग्रेस को अलविदा कहने के कयास लगाए जा रहे हैं। 

राज्यसभा चुनाव में 'क्रॉस वोटिंग' बनी बगावत की वजह 
हरियाणा में हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को उस समय गहरा धक्का लगा, जब पार्टी के 5 विधायकों ने आधिकारिक उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध के खिलाफ जाकर निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के पक्ष में मतदान किया। इन पांच संदिग्ध विधायकों में नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि शैली चौधरी उन विधायकों के जत्थे में शामिल थीं, जिन्हें टूट से बचाने के लिए कांग्रेस ने तीन दिनों तक हिमाचल प्रदेश के होटलों में 'बाड़ेबंदी' के तहत रखा था। तमाम पहरेदारी के बावजूद वे भाजपा समर्थित निर्दलीय खेमे के संपर्क में आ गईं। मतदान के दिन शैली चौधरी को मुख्यमंत्री नायब सैनी के राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी के साथ देखे जाने के बाद से ही उनके पाला बदलने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।

सोची-समझी रणनीति के तहत कदम बढ़ाया 
सूत्रों की मानें तो रामकिशन गुर्जर और शैली चौधरी ने बहुत ही सोची-समझी रणनीति के तहत कदम आगे बढ़ाए हैं। पहले रामकिशन गुर्जर ने संगठन से इस्तीफा दिया ताकि दबाव बनाया जा सके। अब शैली चौधरी के अगले कदम का इंतजार है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शैली चौधरी खुद इस्तीफा देती हैं, तो दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती है। लेकिन, यदि कांग्रेस उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित करती है, तो वे एक 'बागी विधायक' के रूप में अपनी सदस्यता बरकरार रख सकती हैं। फिलहाल, वे हाईकमान के रुख का इंतजार कर रही हैं, ताकि कानूनी जटिलताओं से बच सकें।

रिश्तेदारी का सेतु और भाजपा का 'मिशन सेंधमारी'
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे के पीछे पारिवारिक रिश्तों की भी अहम भूमिका बताई जा रही है। रामकिशन गुर्जर की छोटी बेटी का विवाह केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के भतीजे उत्कर्ष चौधरी से हुआ है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसी पारिवारिक संबंध के जरिए भाजपा ने कांग्रेस के इस मजबूत किले में सेंध लगाने की पटकथा तैयार की। सूत्रों का दावा है कि यदि शैली चौधरी इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होती हैं, तो उन्हें उपचुनाव में भाजपा के टिकट का आश्वासन भी मिल चुका है। 

हिमाचल की बाड़ेबंदी में भी नहीं रुकी 'हॉर्स ट्रेडिंग' 
कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए शिमला के गलू और कसौली के रमाडा होटल में ठहराया था। इस दौरान कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पल-पल की निगरानी की। पार्टी को भनक लग चुकी थी कि बाड़ेबंदी के भीतर भी कुछ विधायक निर्दलीय प्रत्याशी के संपर्क में हैं। यहां तक कि शिमला पुलिस को खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) की शिकायत देने की चर्चा भी उठी, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई। अंततः वोटिंग के समय जब विधायकों ने अपने बैलेट पेपर एजेंट को दिखाए, तब 5 विधायकों की 'गद्दारी' साफ हो गई।

नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील
नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। यह वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का गृह क्षेत्र है, 2014 में नायब सैनी ने यहां से चुनाव लड़कर रामकिशन गुर्जर को शिकस्त दी थी। वहीं, 2005 में पासा उल्टा था और गुर्जर ने सैनी को हराया था। रामकिशन और शैली चौधरी को पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा का बेहद करीबी माना जाता है। ऐसे में इनका जाना कांग्रेस के 'सैलजा गुट' के लिए भी एक बड़ा झटका है।

जमानत पर बाहर हैं रामकिशन गुर्जर
रामकिशन गुर्जर का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। हुड्डा सरकार में सीपीएस रह चुके गुर्जर फिलहाल एक पत्रकार को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में सजायाफ्ता हैं और हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर हैं। इसी कानूनी अड़चन की वजह से 2019 में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और अपनी पत्नी शैली चौधरी को राजनीति में उतारा। अब बदली हुई परिस्थितियों में वे भाजपा के साथ अपनी नई पारी शुरू करने की तैयारी में दिख रहे हैं। 

भूपेंद्र हुड्डा बोले- बख्शे नहीं जाएंगे गद्दार 
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने साफ कर दिया है कि पार्टी ने उन पांचों विधायकों को चिन्हित कर लिया है जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की है। हुड्डा ने कहा कि हमने अनुशासनहीनता करने वाले विधायकों के नाम हाईकमान को भेज दिए हैं। पार्टी के साथ विश्वासघात करने वालों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

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