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इस तकनीक से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब सरकारी सेवाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। हरियाणा यह तकनीक चंडीगढ़ को निशुल्क उपलब्ध करा रहा है।

केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के निवासियों के लिए सरकारी कामकाज के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। अब शहर के सरकारी विभागों में लोगों को अपने जायज काम के लिए अधिकारियों की मिन्नतें नहीं करनी होंगी और न ही देरी होने पर शिकायतों की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

हरियाणा के सफल 'ऑटो अपील सिस्टम' (AAS) को अब चंडीगढ़ प्रशासन भी अपनाने जा रहा है, जिसके लिए हाल ही में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

ऑटो अपील सिस्टम ऐसे करेगा काम 
यह प्रणाली पूरी तरह से आधुनिक तकनीक पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। सरल शब्दों में कहें तो, यदि किसी नागरिक ने किसी सरकारी सेवा के लिए आवेदन किया है और विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर वह काम पूरा नहीं होता, तो सॉफ्टवेयर अपने आप उस शिकायत को अगले उच्चाधिकारी के पास भेज देगा। 

अभी तक की व्यवस्था में काम रुकने या देरी होने पर पीड़ित व्यक्ति को खुद आवेदन देकर अपील करनी पड़ती थी, जिसमें समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद होते थे। लेकिन इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद, अपील की प्रक्रिया स्वचालित (Automatic) हो जाएगी, जिससे अधिकारियों पर समय सीमा के भीतर काम निपटाने का दबाव बढ़ेगा।

हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन के बीच हुआ एमओयू 
चंडीगढ़ प्रशासन और हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन के बीच हुए इस समझौते के तहत, हरियाणा अपनी इस तकनीक को चंडीगढ़ के साथ साझा करेगा। इस मौके पर यह स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार का कैबिनेट सचिवालय भी सभी राज्यों को ऐसी डिजिटल प्रणालियां विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि ई-गवर्नेंस के जरिए जनता और व्यापारियों को सुगम सेवाएं दी जा सकें। 

5 साल का रहेगा अनुबंध
इस समझौते की सबसे खास बात यह है कि हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन यह सिस्टम चंडीगढ़ प्रशासन को निशुल्क प्रदान कर रहा है। हालांकि, इसे चलाने का पूरा प्रशासनिक खर्च और संचालन की जिम्मेदारी चंडीगढ़ प्रशासन की होगी। तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए हरियाणा का आयोग सहायता प्रदान करेगा। फिलहाल यह अनुबंध 5 वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे भविष्य में दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। 

गोपनीयता और डेटा सुरक्षा का रखा जाएगा ध्यान
समझौते की शर्तों के अनुसार इस सिस्टम का स्वामित्व हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन के पास ही सुरक्षित रहेगा। चंडीगढ़ प्रशासन इसका उपयोग केवल जनसेवाओं के लिए करेगा और इसका कोई भी व्यावसायिक उपयोग वर्जित होगा। साथ ही, बिना पूर्व अनुमति के इस सॉफ्टवेयर या डेटा को किसी भी तीसरी संस्था के साथ साझा नहीं किया जा सकेगा। 

जनता को बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति
हरियाणा का यह मॉडल अब देशभर में चर्चा का विषय बन रहा है। इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि चंडीगढ़ के लोगों को 'राइट टू सर्विस' का वास्तविक लाभ मिलेगा। जब अधिकारियों को पता होगा कि देरी होते ही मामला खुद-ब-खुद ऊपर पहुंच जाएगा, तो कार्यकुशलता में सुधार होगा और भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी।

कुल मिलाकर, चंडीगढ़ प्रशासन का यह डिजिटल कदम सरकारी बाबूगिरी पर लगाम लगाने और जनता के समय की कद्र करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। 

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