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हरियाणा की फरीदाबाद लोकसभा सीट पर बदलाव के कयास लगाए जा रहे है। टिकट पैनल में विपुल गोयल का नाम शामिल करने के बाद इन कयासों को बल मिला है। अब देखना यह है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में किसे टिकट मिलती है।

बिजेन्द्र शर्मा, Faridabad: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चार सीटिंग एमपी के टिकट कट जाने के बाद दिल्ली बॉर्डर से सटे फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में भी बदलाव के कयास लगने शुरू हो गए है। लोकसभा टिकट के पैनल में पूर्व मंत्री विपुल गोयल का नाम आने के बाद इन कयासों को और भी ज्यादा बल मिलना शुरू हो गया है। वैसे तिगांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेश नागर का नाम भी मजबूती से चल रहा है। काबिलेगौर यह है कि कभी कांग्रेस का गढ़ समझे जाने वाली फरीदाबाद लोकसभा सीट पर 1996 के बाद जनता का मूड कुछ बदला-बदला सा नजर आने लगा है।

भाजपा उम्मीदवार 3 बार लगातार जीती

फरीदाबाद लोकसभा सीट पर 1996, 1998 व 1999 में क्षेत्र की जनता ने रामचन्द्र बैंदा जैसे भाजपा उम्मीदवार को लगातार तीन बार जीताकर हैट्रिक बनवा दी, जबकि 1996 से पूर्व तक फरीदाबाद में रामचंद्र बैंदा के नाम को कोई जानता तक नहीं था। 2014 व 2019 में भी लगातार दो बार यहां की जनता ने कृष्णपाल गुर्जर पर अपना भरोसा जताया। वैसे सही मायने में देखा जाए तो 1996 से 1999 के दौरान रामचन्द्र बैंदा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लहर में जीते तो 2014 व 2019 में कृष्णपाल गुर्जर मोदी लहर में जीते। यहां यह बात साफ हो जाती है कि कैंडिडेट यहां कोई मायने नहीं रखता। बल्कि लोग केन्द्रीय नेतृत्व पर ही भरोसा जताते है।

फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में 19 लाख से अधिक मतदाता

फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र की 19 लाख 35 हजार मतदाताओं वाली सीट पर जातीय आंकड़ों पर भी जाया जाए तो जाट व दलित समुदाय के बाद पिछड़ा वर्ग से संबंध रखने वाले मतदाताओं की यहां अच्छी खासी संख्या है। इसके अलावा ब्राह्मण व पंजाबी समुदाय के बाद गुर्जर बिरादरी का नम्बर आता है। मगर बात विपुल गोयल की जाए तो पिछले विधानसभा चुनाव में उनका टिकट अवश्य कटा था लेकिन कुछ वर्षों के बनवास के बाद पार्टी ने उन्हें संगठन में एक बड़ी जिम्मेदारी भी दी है। जिस हिसाब से भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व विभिन्न लोकसभा क्षेत्रों में सीटिंग एमपी के टिकट काट रहा है, अगर ऐसे में फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र से भी सीटिंग एमपी का टिकट काट दिया जाता है तो कोई अचरज की बात नहीं होगी। पार्टी को यह बात अच्छी तरह से पता है कि इस लोकसभा सीट पर जिसको भी उम्मीदवार बनाया जाएगा, वह मोदी के नाम पर ही चुनावी वैतरणी पार करेगा।

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