हरियाणा की बहादुरगढ़ पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय नवजात शिशु तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक महिला समेत तीन तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है, जो महज तीन दिन के मासूम बच्चे का सौदा करने की फिराक में थे। हालांकि, गिरोह का मुख्य सरगना और उसका एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया, जिनकी तलाश में पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं।
घेराबंदी कर दबोचे गए तस्कर
डीसीपी मयंक मिश्रा ने बुधवार को सिटी थाने में प्रेस वार्ता के दौरान इस सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक गिरोह पंजाब से नवजात बच्चे को लेकर दिल्ली की ओर जा रहा है, जिसे वहां ऊंचे दामों में बेचा जाना है। सूचना के आधार पर पुलिस ने मंगलवार रात सेक्टर-9 मोड़ बाईपास के पास कड़ी नाकाबंदी की। चेकिंग के दौरान काले रंग की आई-20 कार को रोका गया, जिसमें सवार महिला और दो पुरुषों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसी दौरान पीछे आ रही दूसरी कार को छोड़कर मुख्य आरोपी अपने साथी के साथ फरार हो गया।
लाखों में होता था मासूमों का सौदा
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों के पास से तीन दिन का एक नवजात शिशु सुरक्षित बरामद किया गया है। बच्चे को तुरंत नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत स्थिर बताई है। प्रारंभिक पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गिरोह ने कबूल किया कि उन्होंने इस बच्चे को पंजाब के फरीदकोट के एक दंपति से करीब 2.25 लाख रुपये में खरीदा था और दिल्ली में इसे 9.25 लाख रुपये में बेचने का सौदा तय हुआ था। यानी एक मासूम की जान पर यह गिरोह सीधे तौर पर 7 लाख रुपये का मुनाफा कमाने वाला था।
सोशल मीडिया के जरिए ढूंढते थे 'शिकार'
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से काम करता था। ये लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए ऐसे निसंतान दंपतियों से संपर्क साधते थे जो गोद लेने की प्रक्रिया से बचना चाहते थे। साथ ही वे ऐसे गरीब या मजबूर परिवारों को निशाना बनाते थे जो अपने बच्चे को पालने में असमर्थ थे। उनसे कम कीमत में बच्चा खरीदकर ये तस्कर उन्हें अमीर ग्राहकों को लाखों रुपये में बेच देते थे। अब तक यह गिरोह पंजाब से महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में करीब पांच बच्चों की तस्करी करने की बात स्वीकार कर चुका है।
आरोपियों की पहचान और बरामदगी
पकड़े गए आरोपियों की पहचान गाजियाबाद निवासी सलीम अहमद और अकिल मलिक के रूप में हुई है, जबकि महिला आरोपी की पहचान पंजाब के मुक्तसर निवासी बेअंत कौर के तौर पर हुई है। पुलिस ने मौके से दो गाड़ियां और कई संदिग्ध मेडिकल दस्तावेज भी जब्त किए हैं। फरार मुख्य आरोपी की पहचान 'लाडी' के रूप में हुई है। पुलिस को अंदेशा है कि यह गिरोह केवल बच्चों की खरीद-फरोख्त ही नहीं, बल्कि अस्पतालों या सार्वजनिक स्थानों से शिशु चोरी की वारदातों में भी लिप्त हो सकता है।
पूरे नेटवर्क को खंगाल रही पुलिस
डीसीपी मयंक मिश्रा के अनुसार मुख्य आरोपी लाडी की गिरफ्तारी के बाद इस रैकेट की और भी परतें खुलने की उम्मीद है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह के तार और किन-किन राज्यों से जुड़े हैं और क्या इसमें कुछ अस्पताल कर्मी या बिचौलिए भी शामिल हैं। फिलहाल तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।










