हरियाणा की राजनीति में बड़ा घमासान देखने को मिल रहा रहा है । इस बार सतीश नांदल के मैदान में उतरने के पीछे एक सोची-समझी सियासी रणनीति बताई जा रही है, जिसकी पटकथा दिल्ली में लिखी गई।सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर मची खींचतान का फायदा उठाने के लिए भाजपा ने अपनी बिसात बिछाई है। जानकारी के मुताबिक हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले एक केंद्रीय मंत्री ने पूरी प्लानिंग की, जबकि गन्नौर से निर्दलीय विधायक देवेंद्र कादियान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई। कादियान ने ही अपने व्यावसायिक सहयोगी सतीश नांदल का नाम आगे बढ़ाया, जिसे भाजपा नेतृत्व की हरी झंडी मिली।
राजनीति का गणित और चुनौतियां
सतीश नांदल की स्थिति के अनुसार फिलहाल उन्हें 7 भाजपा विधायकों और 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वोट जीतने के लिए यदि इनेलो 2 विधायक) नांदल का समर्थन करती है, तो उन्हें कांग्रेस के 9 वोटों की आवश्यकता होगी। यदि इनेलो समर्थन नहीं देती है, तो उन्हें जीत के लिए 11 क्रॉस वोट चाहिए होंगे। यदि जानकारों की माने तो कांग्रेस के एक धड़े की नाराजगी नांदल के लिए बड़ा अवसर है।
क्या कहता है कानून?
इस चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कानूनी विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने बताया कि राज्यसभा चुनाव में पार्टियां अपने विधायकों को व्हिप जारी नहीं कर सकतीं, क्योंकि यह विधानसभा की कार्यवाही का हिस्सा नहीं है। हालांकि, 'ओपन बैलेट' सिस्टम के चलते विधायकों को अपना वोट अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य है, अन्यथा वोट रद्द हो जाएगा। पार्टी बागी विधायकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तो कर सकती है, लेकिन इससे उनकी विधायकी सुरक्षित रहेगी।
भाजपा की सक्रियता
भाजपा ने राज्यसभा चुनाव को देखते हुए अपने सभी विधायकों और मंत्रियों को 14 से 16 मार्च तक चंडीगढ़ में रहने के निर्देश दिए हैं, जहां रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बैठकें की जाएंगी।
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