Air Pollution: राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में इस समय आसमान में अभी धुंध देखने को मिल रहा है। धुंध या फिर यूं कहें कि धूंए जैसी सफेदी ने इस वक्त आसमान के नीलेपन को छीन लिया है। इस पर लोग अटकलें लगा रहें हैं कि ईरान और इजरायल के युद्ध की वजह से ऐसा हो रहा है। लोगों का अनुमान है कि तेल के टैंकर्स में लगी आग के धुएं की वजह से ऐसा हो रहा है। वहीं एक्सपर्ट लोगों का मानना है कि इसकी संभावना बहुत कम है।
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह जो धुंध उत्तर भारत के आसमान में देखने को मिल रहा है। यह पाकिस्तान के बलूचिस्तान से आ रही धूल का असर है। ईरान वाला धुंध अभी हमारे देश से बहुत दूर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज बेंगलुरु के एयर पलूशन एक्सपर्ट गुफरान वेग के अनुसार, ईरान के ऊपर वायुमंडलीय हवाएं पश्चिम की ओर वह रही हैं। वहां की आग से उठने वाला धुआं अभी तक पर्याप्त दूर तक नहीं फैला है।
भारत तक नहीं पहुंचा ईरान का धुआं
बेग ने कहा है कि उपग्रह से ली गई तस्वीरों के अनुसार, धुआं का गुबार अभी 500 किलोमीटर दूर तक ही फैला है। जो कि भारत और इजराइल की दूरी का लगभग एक चौथाई है। उन्होंने आगे कहा कि अगर यह आग लंबे समय तक चलती रहती है और यह धुंआ आंधी के संपर्क में आता है तभी यह भारत के वातावरण को प्रभावित कर सकेगा। वरना इसके द्वारा भारत की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है।
क्या भारत तक आ सकता यह धुआं
आईएमडी के प्रमुख मृत्युंजय मोहापात्रा के मुताबिक, हवा की दशा ईरान के धुएं को भारत तक लाने के अनुकूल है। लेकिन यह धुआं भारत तक आएगा या नहीं यह कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे वायुमंडल में इसकी गहराई, हवा कायम रहने की क्षमता और धुएं का प्रकार इत्यादि। मंगलवार को भारत के हरियाणा से लेकर बंगाल तक और उससे भी आगे तक कोहरा छाया रहा। वहीं दिल्ली एनसीआर में इसका प्रभाव सबसे अधिक देखा गया। सुबह 7 से 8 के बजे के आसपास हिंडन हवाई अड्डे पर दृश्यता सबसे कम 600 मीटर दर्ज की गई।
भारत में धुंध का कारण
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, देश में धुंध का मुख्य कारण पूर्व से आने वाली धुंध से भरी हुई हवाएं हैं। यह हवाएं निचले स्तर पर शांत परिस्थितियों वाले क्षेत्र से आ रही थीं। आईएमडी के एक और वरिष्ठ वैज्ञानिक ने डेटा देखाते हुए बताया कि इस क्षेत्र में पहले भी मार्च के महीने में घना कोहरा रह चुका है। उन्होंने बताया कि साल 2008 में 6 से 8 मार्च के बीच घने कोहरे की वजह से उत्तर भारत में पावर ट्रांसमिशन लाइंस में गड़बड़ी आ गई थी।









