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Home Loan tips: भारत में एक व्यक्ति एक साथ दो होम लोन ले सकता है, अगर उसकी आय दोनों EMI संभाल सके। बैंक आमतौर पर कुल EMI को मासिक आय के 40-50% के भीतर रखने का नियम देखते हैं। दूसरे घर के लोन पर भी सेक्शन 24 और 80C के तहत कुछ टैक्स छूट मिल सकती है।

Home Loan tips: आजकल कई लोग अपने पहले घर का लोन चल रहा होने के बावजूद दूसरा घर खरीदने का प्लान बनाते हैं। वजह अलग-अलग हो सकती है कि बड़ा घर लेना, निवेश करना या किराए के लिए दूसरी प्रॉपर्टी खरीदना। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या एक व्यक्ति एक साथ दो होम लोन ले सकता?

सीधा जवाब है, हां ऐसा किया जा सकता है। बैंक एक ही समय में दो होम लोन देने से मना नहीं करते। लेकिन मंजूरी इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी आमदनी दोनों लोन की ईएमआई आराम से चुका सकती है या नहीं।

बैंक किन बातों पर करते हैं फोकस
जब आप दूसरा होम लोन लेने के लिए आवेदन करते हैं तो बैंक इसे लगभग उसी तरह जांचते हैं जैसे पहला लोन। सबसे पहले बैंक आपकी आय और खर्च का आकलन करते हैं। बैंक आमतौर पर FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) का इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब यह है कि आपकी कुल ईएमआई और बाकी लोन की किस्तें मिलाकर आपकी मासिक आय का 40 से 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

अगर आपके ऊपर पहले से होम लोन की बड़ी ईएमआई चल रही है, तो बैंक यह देखेंगे कि दूसरी ईएमआई जोड़ने के बाद भी आपकी आय इसे संभाल सकती है या नहीं। अगर पहले लोन के बाद आपकी सैलरी बढ़ गई है, तो दूसरा लोन मिलने की संभावना ज्यादा हो जाती है।

क्रेडिट हिस्ट्री भी अहम
दूसरा होम लोन मिलने में क्रेडिट हिस्ट्री भी बड़ी भूमिका निभाती है। अगर आपने पहले होम लोन की ईएमआई समय पर चुकाई है और आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो बैंक का भरोसा बढ़ जाता है। ऐसे में दूसरे लोन की मंजूरी आसान हो सकती है।

लोग क्यों लेते हैं दूसरा होम लोन
दूसरा घर खरीदना आजकल काफी आम हो गया है। कई लोग करियर की शुरुआत में छोटा फ्लैट लेते हैं और बाद में आय बढ़ने पर बड़ा घर खरीद लेते हैं, जबकि पहला घर अपने पास ही रखते हैं।

कुछ लोग दूसरा घर निवेश के लिए खरीदते हैं। कई शहरों में किराए से मिलने वाली आय EMI का कुछ हिस्सा कवर कर देती है, जिससे लोन संभालना आसान हो जाता है। कई परिवार अपने माता-पिता या बच्चों के लिए भी दूसरा घर खरीद लेते हैं जबकि पहला लोन अभी चल रहा होता है।

टैक्स नियम क्या कहते हैं?
अगर आपके पास दो होम लोन हैं तो टैक्स नियम थोड़ा जटिल हो सकते हैं। भारत में इनकम टैक्स एक्ट के तहत अगर आप जिस घर में रहते हैं उस पर लिए गए लोन के ब्याज पर सेक्शन 24 के तहत सालाना 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है।

अगर दोनों घर 'सेल्फ-ऑक्यूपाइड' माने जाते हैं तो भी यही कुल सीमा लागू रहती है। लेकिन अगर दूसरा घर किराए पर दिया गया है, तो ब्याज कटौती के नियम अलग तरीके से लागू हो सकते हैं क्योंकि किराए की आय टैक्स में शामिल होती है। वहीं होम लोन के प्रिंसिपल भुगतान पर सेक्शन 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिल सकती है, जो अन्य निवेश विकल्पों के साथ मिलकर लागू होती है।

फैसला लेने से पहले क्या सोचें
भले ही बैंक दो होम लोन देने के लिए तैयार हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह हर किसी के लिए आसान होगा। दो लंबी अवधि की EMI चलने से मासिक बजट पर दबाव बढ़ सकता है। अगर अचानक खर्च बढ़ जाए, नौकरी में बदलाव हो जाए या ब्याज दरें बढ़ जाएं, तो EMI चुकाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दूसरा लोन लेने से पहले यह जरूर देखें कि आय कम होने या ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में भी बजट संभल पाएगा या नहीं।

आखिरकार बैंक के लिए सबसे अहम बात यह है कि आप लोन चुका सकते हैं या नहीं। लेकिन उधार लेने वाले के लिए असली सवाल यह होता है कि दो प्रॉपर्टी लोन के साथ भी क्या मासिक बजट में पर्याप्त राहत बचती है या नहीं।

(प्रियंका कुमारी)

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