लद्दाख के प्रसिद्ध साइंटिस्ट सोनम वांगचुक पर लगे एनएसए को हटा दिया गया है, जिसके बाद उन्हें जोधपुर जेल से रिहा कर दिया गया है। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने इस मामले को लेकर मोदी सरकार से कई सवाल पूछे हैं।

लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को आज शनिवार राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहाई मिल गई है। उन्हें करीब 170 दिन तक हिरासत में लेना पड़ा है। केंद्र सरकार ने अब उनके खिलाफ लगाए गए एनएसए को तत्काल प्रभाव से हटाने का फैसला लिया है, जिसके बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी है। आम आदमी पार्टी, दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। 

लद्दाख के मशहूर साइंटिस जिन्होंने लद्दाख के लिए, भारतीय सेना के लिए अनगिनत अविष्कार किए। जो गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरी दुनिया के अंदर जाने जाते रहे, उनको एनएसए के अंदर केंद्र सरकार ने गिरफ्तार कर लिया कि यह देश की सिक्योरिटी के लिए खतरा है। कमाल की बात यह है कि उनकी पत्नी सुप्रीम कोर्ट में लड़ रही थी, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था, और केंद्र सरकार अलग-अलग बहाने बना रही थी। 

उन्होंने कहा कि जब सोनम वांगचुक को डिटेन किया गया, तब तमाम मीडिया संस्थानों ने झूठी खबरें चलाई कि इनको कहां-कहां से अवैध पैसा मिल रहा है, यह देश के लिए बड़ा खतरा है। और जब सुप्रीम कोर्ट में सबूत रखने की बात आई तो इनके पास कुछ वीडियो थे, जो बाद में पता चला कि वीडियो भी गलत तरीके से कोर्ट के अंदर पेश करके एक झूठा मामला बनाया जा रहा था। 

उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक को लेकर कभी कभी न कभी उन्हें निर्दोष होना ही था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई से पहले ही उन पर लगा एनएस हटा दिया। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या किसी भी निर्दोष इंसान को पकड़कर जेल में डाला जा सकता है। क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन या शांतिपूर्ण मांग को दबाने के लिए क्या किसी को भी जेल में डाल सकते हैं।

उन्होंने पूछा कि क्या सोनम वांगचुक को 170 दिन वापस मिल जाएंगे। क्या उन्हें बदनाम करने वाले उनसे माफी मांगेंगे। यह सब बड़े सवाल हैं। उन्होंने विपक्ष दलों से भी मांग की कि सोनम वांगचुक के साथ खड़े हों क्योंकि ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है... जैसे कि आम पार्टी के नेताओं को झूठे शराब घोटाले में जेल भेजा था।

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